Retail Inflation: महंगाई दर अप्रैल में घटकर 3.16% पर आई, खाने-पीने की चीजें हुईं सस्ती… – RGH NEWS
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Retail Inflation: महंगाई दर अप्रैल में घटकर 3.16% पर आई, खाने-पीने की चीजें हुईं सस्ती…

Retail Inflation भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आई है. अप्रैल महीने में देश की खुदरा महंगाई दर यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) घटकर 3.16% पर आ गई है. यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई है. मार्च में यह आंकड़ा 3.34% था, जबकि रॉयटर्स के सर्वे में 3.27% का अनुमान जताया गया था. इस तरह, अप्रैल का डेटा उम्मीद से भी बेहतर निकला है.

 

इस वजह से कम हुई महंगाई

 

महंगाई में इस गिरावट का सबसे बड़ा योगदान खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी का रहा. अप्रैल में फूड इन्फ्लेशन घटकर 1.78% पर आ गया, जबकि मार्च में यह 2.69% था. भारत जैसे देश में जहां आम आदमी की खर्च का बड़ा हिस्सा खाद्य सामग्री पर होता है, वहां यह गिरावट एक महत्वपूर्ण राहत मानी जा रही है.

 

Bank of America की एक रिपोर्ट में पहले ही संकेत दिए गए थे कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में रहेंगी, हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि कोर इन्फ्लेशन (जिसमें खाद्य और ईंधन को छोड़ दिया जाता है) में सोने की कीमतों में तेजी के कारण इजाफा हो सकता है. वैश्विक बाजार में तनाव और व्यापारिक अस्थिरता के चलते सोना अप्रैल 22 को $3,498.24 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिससे महंगाई पर कुछ असर पड़ा है.

 

रेपो रेट पर आ सकता है फैसला

अब जब CPI लगातार गिर रहा है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास मौद्रिक नीति को और अधिक नरम करने का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 9 अप्रैल की बैठक के बाद संकेत दिए थे कि बैंक अब न्यूट्रल से एकॉमोडेटिव स्टांस की ओर बढ़ेगा, यानी ब्याज दरों में कटौती कर अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करेगा. RBI ने पिछली बैठक में रेपो रेट को 6% तक घटाया था, जो लगातार दूसरी कटौती थी.

 

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Retail Inflationआर्थिक मोर्चे पर एक और बड़ा आंकड़ा 30 मई को सामने आएगा, जब भारत की मार्च तिमाही की GDP ग्रोथ के आंकड़े जारी होंगे. Bank of America का अनुमान है कि यह आंकड़ा 6.7% रह सकता है, जो दिसंबर तिमाही के 6.2% से बेहतर रहेगा. कुल मिलाकर, महंगाई में लगातार गिरावट आम जनता के लिए राहत भरी खबर है और इससे निवेशकों व नीति निर्माताओं दोनों का भरोसा बढ़ा है. यदि यह रुझान बना रहता है, तो देश में ब्याज दरों में और कटौती के जरिए आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलने की पूरी संभावना है.

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