यहां पुलिसकर्मियों ने ही कर दी हड़ताल,मचा बवाल

छत्तीसगढ़ से सटे झारखंड में अजीबो गरीब स्थिति हो गयी है। झारखंड के पुलिसकर्मी ही हड़ताल पर चले गये हैं। इस घटना के बाद झारखंड में हड़कंप मचा है। पिछले पांच दिनों से झारखंड में सहायक पुलिसकर्मी हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इन पुलिसकर्मियों को सरकार ने अनुबंध पर नियुक्ति किया था, लेकिन सालों गुजर जाने के बाद इन्हें स्थायी नहीं किया गया है, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने हड़ताल कर दिया है। स्थायीकरण और वेतनमान की मांग को लेकर सहायक पुलिसकर्मियों ने हड़ताल किया है।
यहां पुलिसकर्मियों ने ही कर दी हड़ताल,मचा बवाल
दरअसल साल 2017 में राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में विधि-व्यवस्था दुरुस्त रखने में सहायता के लिए सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति हुई थी, वह आज फिर एक बार राजधानी पहुंचकर मोरहाबादी मैदान में बैठ गए हैं। सोमवार 1 जुलाई को पदस्थापन वाले जिलों में सामूहिक अवकाश पर रहने के बाद सहायक पुलिसकर्मियों ने रांची पहुंचकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। राज्य में विधानसभा चुनाव निकट है। ऐसे में सहायक पुलिसकर्मियों ने भी रांची में डेरा डाल कर लंबा आंदोलन करने का शंखनाद कर दिया है।
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राज्य के 12 अति नक्सल प्रभावित जिलों के करीब ढाई हजार सहायक पुलिसकर्मियों का आंदोलन रांची के मोरहाबादी मैदान में शुरू हो गया है. सात साल से काम कर रहे सहायक पुलिसकर्मी अपने अनुबंध की नौकरी को स्थायी की मांग कर रहे हैं। दो साल पहले भी मानसून के महीने में सहायक पुलिस कर्मियों का लंबा आंदोलन मोरहाबादी मैदान में चला था, हालांकि तब सेवा विस्तार के बाद सहायक पुलिसकर्मियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था।
यहां पुलिसकर्मियों ने ही कर दी हड़ताल,मचा बवाल
चौकाने वाली बात ये ही कि 2017 से मात्र 10 हजार रुपये के मासिक मानदेय पर नौकरी कर रहे हैं। 10 हजार रुपये में अब परिवार चलाना संभव नहीं है। राज्य में पुलिस जवानों की घोर कमी है। ऐसे में पुलिस सेवा के खाली पदों पर उनका समायोजन की मांग हो रही है। मुख्यमंत्री आवास के लिए निकले आंदोलनरत मनरेगा कर्मियों के नेता जॉन पीटर बागे ने कहा कि राज्य की सरकार ने उनसे वादा किया था कि उनकी सेवा स्थाई होगी और उन्हें वेतनमान मिलेगा। वर्तमान सरकार अब अपना कार्यकाल पूरा करने को है। इसके बावजूद मनरेगा कर्मियों की न तो सेवा स्थायी हुई है और न ही वेतनमान दिया गया है।



