PM Fasal Bima Yojana: कृषि मंत्री का बड़ा ऐलान, फसल बीमा में किए गए दो बड़े बदलाव

PM Fasal Bima Yojana प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए दो महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि अब तक योजना में जंगली जानवरों द्वारा फसल को पहुंचे नुकसान और भारी बारिश, बाढ़ या पानी भरने से होने वाले नुकसान को कवर नहीं किया जाता था। लेकिन लंबे समय से किसान इन दोनों जोखिमों को बीमा कवरेज में शामिल करने की मांग कर रहे थे। सरकार ने यह मांग स्वीकार करते हुए अब इन दोनों प्रकार के नुकसान को भी योजना के दायरे में जोड़ दिया है। इससे लाखों किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और वन्यजीवों से फसल सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त जारी होने के बाद यह किसानों के लिए लगातार दूसरी बड़ी राहत बनकर आई है।
ये 2 नुकसान भी हुए शामिल
- अगर हाथी या कोई भी जंगली जानवर फसल को नुकसान पहुंचाता है तो उसका भी कवर फसल बीमा योजना के अंतर्गत होगा।
- अतिवृष्टि, बाढ़ या जलभराव से भी अगर फसल को नुकसान होता है तो भी इसके लिए पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत मुआवजा क्लेम कर सकते हैं।
फसल बीमा कराने के लिए कितना पैसा देना पड़ता है
PM Fasal Bima Yojanaपीएम फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को सरकार की ओर से बड़ी राहत दी जा रही है। किसान बहुत ही मामूली प्रीमियम देकर अपनी फसल को कई तरह के नुकसान से बचा सकते हैं। बाकी पैसा सरकार की ओर से दिया जाता है। मान लीजिए फसल बीमा का प्रीमियम 10000 रुपये बनता है। तो आपको खरीफ की फसल के लिए 200 रुपये और रबी की फसल के लिए 150 रुपये ही देने होंगे। यही नहीं अगर आपने Kisan Credit Card के तहत लोन लिया है तो आपको यह प्रीमियम नहीं देना होगा।
2% प्रीमियम देना होता है खरीफ की फसल के लिए
1.5 प्रीमियम लगता है रबी की फसल के लिए
5% प्रीमियम वाणिज्यिक या बागवानी फसलों के लिए
अभी तक पीएम फसल बीमा योजना में क्या-क्या है कवर
| कवरेज | जोखिम |
| बुआई/रोपाई | किसान मौसम की वजह से बुआई नहीं कर पाए तो |
| खड़ी फसल को नुकसान | बिना मौसम की बारिश, तूफान, ओलावृष्टि, बाढ़, कीट प्रकोप, फसल को बीमारी या प्राकृतिक आपदा |
| फसल कटाई के बाद कटाई के बाद | 14 दिनों तक फसल को नुकसान ओलावृष्टि, चक्रवात या अन्य प्राकृतिक आपदा |
| अन्य आपदाएं | ओलावृष्टि, लैंड स्लाइड, जलभराव, बादल फटना या प्राकृतिक कारण से लगी आग |



