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बजट 2026 से पहले शिक्षा में बड़े बदलाव की मांग, क्या आज होगा ‘एक देश–एक परीक्षा’ का ऐलान.पढ़े पूरी खबर

One Nation One Exam: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने वाली हैं, और इस दौरान सभी की निगाहें शिक्षा क्षेत्र में होने वाले योगदान पर टिकी हुई हैं। दरअसल, शिक्षा विशेषज्ञ ‘एक देश एक परीक्षा’ की अवधारणा को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। यदि आज बजट में वित्त मंत्री इस संबंध में कोई घोषणा करती हैं, तो इससे देश के शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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इसलिए जरूरी है ‘एक देश एक एग्जाम’

एजुकेशनल एक्सपर्ट कहते हैं कि देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी की टेक्नोलॉजी जिस तरीके से फल-फूल रही है, उसके अनुसार एजुकेशन और एग्जाम का पैटर्न बदलने की जरूरत है. AI बेस्ड एजुकेशन, टीचिंग, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर काउंसिलिंग और स्किल ट्रेनिंग की जरूरत है, ताकि स्कूल, कोचिंग और इंडस्ट्री मिलकर स्टूडेंट्स को न सिर्फ डिग्री लेने लायक, बल्कि जॉब, एम्प्लॉयमेंट और बिजनेस करने के लायक बना सके

 

बता दें कि आजकल के युवाओं में JEE एग्जाम को लेकर काफी क्रेज देखने को मिलता है. अगर 1978 में JEE की सीटें देखें तो आज सीटें 7 गुना बढ़ गई हैं, वहीं एग्जाम देने वालों की संख्या भी 48 गुना हो गई है, यानी कॉम्पिटिशन पहले से कहीं ज्यादा टफ हो गया है और बेशक सरकार की तरफ से कॉलेज और सुविधाएं दी गई हैं, लेकिन स्टूडेंट्स पर दबाव बहुत ज्यादा है, जिसे कई बार वे सह नहीं पाते और हादसे हो जाते हैं, इसलिए बदलाव की जरूरत है.

AI प्लेटफॉर्म: दीक्षा और आत्मनिर्भर की भूमिका

बजट 2026 में दीक्षा और स्वयं जैसे AI-आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म को और कठोर बनाने की उम्मीद है, ताकि इससे पढ़ाई हर छात्र तक पहुंच सके. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म  को बढ़ावा देना काफी नहीं है. इसके आंकड़े बताते हैं कि IIT-JEE के टॉप 500 छात्रों में से 90 फीसदी से ज्यादा केवल IIT बॉम्बे को चुनते हैं. इसका अर्थ यह है कि छात्र कॉलेज का चुनाव पढ़ाई से ज्यादा नौकरी के मौके पर ध्यान दे रहे हैं.

कम और एक जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि देश में बहुत ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाएं हैं. इन्हें कम किया जाना चाहिए और परीक्षाएं ऐसी हों, जो साल में एक बार की बजाय कई बार दी जा सकें. इससे छात्रों पर दबाव कम होगा. जैसे IIM अब 12वीं के बाद ही मैनेजमेंट कोर्स शुरू कर रहे हैं, वैसे ही ग्रेजुएशन लेवल पर भी ऐसे कोर्स लाए जाने चाहिए जो सीधे इंडस्ट्री से जुड़े हों.

क्यों? स्कूल स्तर की पढ़ाई पर ध्यान देने की जरूरत है

यदि बच्चों को बचपन से ही सही दिशा मिले, तो आगे जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं का बोझ कम हो सकता है. इसके लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को मजबूत करना  बेहद जरूरी है. नई शिक्षा नीति 2020 सही दिशा में कदम थी, लेकिन जमीन पर इसका सही ढंग से लागू न हो पाना एक बड़ी समस्या है. कई कॉलेज सॉफ्ट स्किल्स के नाम पर ऐसे कोर्स चला रहे हैं, जिनमें सही ट्रेनर और अनुभव की कमी है.

करियर काउंसलिंग और ट्रेनिंग में बड़ी कमी

भारत में आज 10 हजार से भी कम सर्टिफाइड करियर काउंसलर हैं. नई शिक्षा नीति में यह साफ नहीं बताया गया है कि छात्रों को कौन-कौन से जरूरी स्किल्स सिखाए जाने चाहिए. जब तक सही ट्रेनिंग और मान्यता नहीं मिलेगी, तब तक सुधार अधूरा रहेगा.

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स्कूल और कोचिंग को साथ लाने की जरूरत

सरकार ने नवंबर 2024 में कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियम बनाए, जो एक अच्छा कदम है. लेकिन विशेषज्ञों की मानeतो कोचिंग को स्कूल से अलग नहीं, बल्कि उसके साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए. अगर स्कूल, कोचिंग और इंडस्ट्री मिलकर काम करें, तो छात्रों को सही उम्र में सही करियर की जानकारी मिल सकती है.

 

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