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NPS Rules: सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम, बदल जाएंगे NPS के विड्रॉल और पेंशन नियम!

NPS Rules राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत सेवानिवृत्ति के बाद सुनिश्चित और स्थिर आय का रास्ता तैयार करने के लिए  ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. इस समिति को NPS के मौजूदा ढांचे के भीतर ऐसे नियम और दिशानिर्देश तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिनके ज़रिये पेंशनधारकों को बाजार आधारित लेकिन कानूनी रूप से लागू होने वाली सुनिश्चित पेंशन मिल सके.

 

 

PFRDA का यह कदम न केवल पेंशनधारकों की रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि सरकार के विकसित भारत 2047 के उस व्यापक लक्ष्य से भी जुड़ा है, जिसमें हर नागरिक को बुढ़ापे में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना शामिल है.

 

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क्या होगा बदलाव

 

इस 15-सदस्यीय समिति की अध्यक्षता डॉ. एम. एस. साहू करेंगे, जो Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में Dr. Sahoo Regulatory Chambers के संस्थापक हैं. समिति में कानून, एक्चुरियल साइंस, वित्त, बीमा, पूंजी बाजार और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. इसके साथ ही PFRDA ने समिति को यह अधिकार भी दिया है कि वह जरूरत पड़ने पर बाहरी विशेषज्ञों और मध्यस्थ संस्थाओं को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में चर्चा में शामिल कर सके. समिति को Structured Pension Payouts पर एक स्थायी सलाहकार निकाय के रूप में काम करना होगा. इसका मुख्य उद्देश्य NPS में सुनिश्चित पेंशन भुगतान के लिए एक ऐसा नियामकीय ढांचा तैयार करना है, जो 30 सितंबर 2025 को जारी PFRDA के परामर्श पत्र में सुझाई गई पेंशन योजनाओं को आगे बढ़ा सके. इसके तहत समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि NPS में निवेश की accumulation अवस्था से पेंशन भुगतान यानी decumulation चरण तक ग्राहकों के लिए प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और बिना रुकावट के हो.

 

ऐसे मिलेगा आपको फायदा

 

NPS Rulesइसके अलावा, समिति बाजार आधारित गारंटी को कानूनी रूप से लागू करने के तरीकों पर भी विचार करेगी. इसमें novation और settlement जैसे कॉन्सेप्ट्स पर मंथन शामिल है, ताकि पेंशन भुगतान की विश्वसनीयता बनी रहे. साथ ही, लॉक-इन अवधि, निकासी की सीमाएं, प्राइसिंग मॉडल और सेवा शुल्क जैसे परिचालन पहलुओं की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाएगी. जोखिम प्रबंधन भी समिति के प्रमुख कार्यों में शामिल होगा. इसके तहत पूंजी और सॉल्वेंसी आवश्यकताओं को तय करने के साथ-साथ उन कर (टैक्स) पहलुओं की भी समीक्षा की जाएगी, जिन मामलों में पेंशनधारक NPS से बाहर निकले बिना ही सुनिश्चित पेंशन प्राप्त करेगा. इसके अलावा, ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक मानकीकृत डिस्क्लोज़र फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे मिस-सेलिंग पर रोक लगे और पेंशन में assurance तथा market-based guarantee के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझाया जा सके. कुल मिलाकर, PFRDA की यह पहल संकेत देती है कि NPS को केवल बाजार-आधारित रिटायरमेंट उत्पाद से आगे ले जाकर एक अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद पेंशन व्यवस्था में बदले जाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है. विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें आने वाले समय में भारत की पेंशन प्रणाली के भविष्य को नई दिशा दे सकती हैं.

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