FMCG Price Hikes: साबुन से लेकर तेल तक, अब FMCG उत्पाद भी होंगे महंगे, जानिए कब से होगा लागू

FMCG Price Hikes: मिडिल ईस्ट की आंच भारतीयों के रसोई घर तक पहुंच गई है। पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ने के बाद अब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामान भी महंगे हो सकते हैं। दरअसल, ईरान में जंग की वजह से साबुन, तेल, सोडा जैसे तमाम सामान महंगे हो सकते हैं। इसके लिए FMCG कंपनियां बड़े पैमाने पर तैयारी कर रही हैं। कंपनियों का कहना है कि इनपुट कॉस्ट बढ़ती जा रही है। कहा जा रहा है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में यह बढ़ोतरी हो सकती है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
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नुवामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी और रुपये के कमजोर होने से इनपुट कॉस्ट बढ़ता जा रहा है। इससे अब कीमतें स्थिर रखना कंपनियों के लिए मुश्किल भरा साबित हो रहा है। ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर कच्चे माल की मौजूदा महंगाई बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कीमतें कम से कम 3 से 4 फीसदी तक बढ़ जाएंगी।
लागत में इजाफा
किसी भी FMCG कंपनी के कुल खर्च का 15 से 20% हिस्सा केवल पैकेजिंग यानी प्लास्टिक की बोतलें, ढक्कन, रैपर पर होता है। क्रूड महंगा होने से पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथाइलीन जैसे पेट्रोकेमिकल्स महंगे हो गए हैं। इससे पैकेजिंग की लागत बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। पेंट कंपनियों के लिए 40% कच्चा माल क्रूड डेरिवेटिव्स से जुड़ा होता है। ऐसे में उनकी लागत बढ़ गई है जिससे प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई गई है।
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इन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
सबसे ज्यादा मार पेंट, खाने का तेल (Edible Oils), साबुन और डिटर्जेंट सेक्टर पर पड़ने वाला है।
पेंट इंडस्ट्री
एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स जैसी कंपनियों ने पहले ही कीमतों में बदलाव शुरू कर दिया है। इनके कच्चे माल का लगभग 40 फीसदी हिस्सा कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स से जुड़ा होता है।
साबुन और डिटर्जेंट
पाम ऑयल और पैकेजिंग मैटेरियल महंगा होने से इनके दाम बढ़ना तय है।
खाने का तेल
वैश्विक अनिश्चितता के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में भी उछाल की संभावना है।
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गर्मी के उत्पादों पर मौसम की मार
FMCG Price Hikesरिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि मार्च के दौरान उत्तर और पूर्वी भारत में हुई बेमौसम बारिश ने गर्मी के सीजन वाले उत्पादों जैसे टैलकम पाउडर, आइसक्रीम और ठंडे पेय पदार्थों (Beverages) की मांग को प्रभावित किया है। इससे वरुण बेवरेजेस और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियों की चौथी तिमाही की बिक्री पर असर पड़ सकता है



