Budget 2026: बजट में Taxpayers के लिए हो सकते हैं ये बड़े ऐलान, AI और डिजिटल सुधारों पर सरकार का फोकस

Budget 2026 केंद्रीय बजट 2026 को वित्त मंत्री 1 फरवरी 2026 को पेश करेंगी. यह बजट फरवरी 2025 के बड़े बजट और 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के बीच आ रहा है. इसलिए इसे मौजूदा व्यवस्था से भविष्य की व्यवस्था की ओर जाने वाला ब्रिज बजट माना जा रहा है, जिसमें भरोसे, आसान अनुपालन और टेक्नोलॉजी पर ज्यादा जोर होगा.
पिछले साल सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था में बदलाव करते हुए टैक्स रिबेट बढ़ाई थी, जिससे ₹12 लाख तक की आय वालों को शून्य टैक्स देना पड़ता है. वहीं, सैलरीड क्लास को ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने से ₹12.75 लाख तक की आय वालों को राहत मिली. पिछले कुछ बजटों से सरकार का फोकस यही रहा है कि सरल और कम झंझट वाली नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए, जिससे टैक्सपेयर्स और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट दोनों को आसानी हो.
ये बजट क्यों मायने रखता है?
क्योंकि यही बजट तय करेगा कि भारत की 7%+ ग्रोथ टिकाऊ बनेगी या नहीं.
अगर टैक्स नहीं घटेगा, तो Budget 2026 टैक्सपेयर्स के लिए अहम क्यों है?
क्योंकि टैक्स राहत सिर्फ रेट घटाने से नहीं आती.
सिस्टम आसान हो, महंगाई कंट्रोल में रहे, नौकरियां बनें- यही असली राहत है.
Budget 2026 में सरकार का सबसे बड़ा दांव किस पर हो सकता है?
जवाब- कैपेक्स यानी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च
क्या अनुमान है?
कैपेक्स: ₹12-13 लाख करोड़
सालाना बढ़ोतरी: 10-15%
कहां खर्च होगा?
सड़कें और हाईवे
रेलवे और लॉजिस्टिक्स
डिफेंस और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर
पावर, रिन्यूएबल और ग्रीन एनर्जी
क्यों जरूरी है?
इंफ्रास्ट्रक्चर=
ज्यादा नौकरियां
प्राइवेट इन्वेस्टमेंट
लॉन्ग-टर्म ग्रोथ
Q2. क्या आम लोगों की खपत (Consumption) सरकार के लिए चिंता है?
जवाब- हां, और यही बजट की सबसे बड़ी चुनौती है.
ग्रामीण मांग अभी पूरी तरह मजबूत नहीं
सरकार क्या कर सकती है?
ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर
रोजगार योजनाएं
स्किलिंग प्रोग्राम
टार्गेटेड वेलफेयर स्कीम्स
प्रशासनिक सुधारों पर जोर दे सकता है बजट
इस बार टैक्स स्लैब या रेट में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है. सरकार का फोकस पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 से नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 की ओर आसान ट्रांजिशन पर रहेगा. उम्मीद है कि टैक्स रिफंड जल्दी मिले, नियमों का पालन आसान हो और प्रोसेस सरल बने.
डिजिटल सिस्टम को और बेहतर बनाने की जरूरत
AIS (वार्षिक सूचना विवरण) और TIS (करदाता सूचना सारांश) आने से टैक्स से जुड़ी जानकारियां एक जगह मिलने लगी हैं, जिससे टैक्स भरना आसान हुआ है. लेकिन कई बार इनमें गलतियां और डुप्लीकेट एंट्री होती हैं. इसलिए सरकार डिजिटल सिस्टम को और पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर काम कर सकती है.
AI के जरिए पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा
अगर AI का सही इस्तेमाल किया जाए तो टैक्स रिटर्न ऑटो-फिल हो सकता है, गलतियां कम होंगी और फाइलिंग आसान होगी. टैक्स रिफंड में देरी आज भी बड़ी समस्या है. सरकार अगर रियल-टाइम स्टेटस और ट्रैकिंग सिस्टम लाती है तो टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ेगा.
टैक्स मामलों का जल्दी निपटारा जरूरी
इनकम टैक्स से जुड़े विवाद और केस काफी लंबे समय तक चलते रहते हैं. टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी है कि मामलों का समय पर और पारदर्शी निपटारा हो.
क्रिप्टो (VDA) टैक्स पर स्पष्ट नियम
फिलहाल क्रिप्टो जैसे डिजिटल एसेट्स पर 30% टैक्स लगता है और नुकसान को एडजस्ट करने की अनुमति नहीं है. जबकि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में इसे कैपिटल गेन की तरह माना जाता है. बजट 2026 में इस पर स्पष्ट और व्यावहारिक नियम आ सकते हैं.
ESOP पर टैक्स सभी कर्मचारियों के लिए टालने की मांग
ESOP मिलने पर तुरंत टैक्स लगने से कर्मचारियों पर बोझ पड़ता है, जबकि उन्हें असली पैसा बाद में मिलता है. अभी यह सुविधा सिर्फ स्टार्टअप कर्मचारियों को है. अगर सभी कर्मचारियों को यह राहत मिले तो यह बड़ा सुधार होगा.
Budget 2026बजट 2026 से उम्मीद है कि टैक्स सिस्टम ज्यादा आसान, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली बनेगा. नया इनकम टैक्स कानून टैक्सपेयर्स के अनुभव को बेहतर बनाने का मौका है. सरकार को रेवेन्यू और आम लोगों की हकीकत दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा.



