Budget 2026: क्या इस बार टैक्सपेयर्स को मिलेगी खुशखबरी! टैक्स स्लैब और वेतन आयोग पर भी होगा बड़ा बदलाव?

Budget 2026 नए साल की शुरुआत के साथ ही देश के गलियारों में हलचल तेज हो गई है और हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है कि इस बार के केंद्रीय बजट में उनके लिए क्या खास होने वाला है। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले साल 2026 के इस बजट से मध्यम वर्ग को काफी आशाएं हैं, क्योंकि पिछला कुछ समय महंगाई के उतार-चढ़ाव के बीच बीता है। ऐसे में आम आदमी इस बार सरकार की ओर से केवल सांत्वना नहीं बल्कि ठोस राहत की तलाश में है। विशेषज्ञों को कहना है कि इस बार सरकार का मुख्य फोकस खपत बढ़ाने और व्यक्तिगत आयकर में छूट देने पर रह सकता है, जिससे सीधे तौर पर बाजार में कैश फ़्लो बढ़ सके।
इनकम टैक्स की सीमाओं में बड़े बदलाव के संकेत
आर्थिक विश्लेषकों के बीच चर्चा हो रही है कि सरकार पुराने और नए टैक्स स्लैब को लेकर कुछ क्रांतिकारी कदम उठा सकती है। वर्तमान में जिस तरह से जीवनयापन की लागत बढ़ी है, उसे देखते हुए करदाताओं की मांग है कि टैक्स फ्री आय की सीमा को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर कम से कम सात लाख रुपये किया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन की राशि को लेकर भी बाजार में काफी उम्मीदें बनी हुई हैं। यदि सरकार इस दिशा में कोई सकारात्मक फैसला लेती है, तो न केवल नौकरीपेशा वर्ग की बचत बढ़ेगी बल्कि वे भविष्य के लिए बेहतर निवेश भी कर पाएंगे।
आठवें वेतन आयोग को लेकर बढ़ती उत्सुकता
देश भर के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस बार बजट के उस हिस्से पर टिकी हैं, जहां आठवें वेतन आयोग के गठन या फिटमेंट फैक्टर में सुधार की चर्चा हो सकती है। पिछले काफी समय से यह मांग उठ रही है कि बढ़ती महंगाई के अनुपात में वेतन ढांचे को फिर से व्यवस्थित करने की जरूरत है। हालांकि सरकार ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन बजट सत्र के दौरान इस दिशा में होने वाली कोई भी घोषणा लाखों परिवारों के जीवन स्तर पर सीधा असर डालेगी। यही कारण है कि इंटरनेट पर इस समय ‘वेतन आयोग’ सबसे ज्यादा ट्रेंड करने वाले विषयों में से एक बना हुआ है।
रियल एस्टेट और होम लोन पर राहत की दरकार
अपना घर खरीदना हर भारतीय का सपना होता है और इस सपने को पूरा करने में होम लोन की ब्याज दरें एक बड़ी बाधा साबित होती रही हैं। रियल एस्टेट सेक्टर की उम्मीद है कि सरकार होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर कुछ और राहत दे सकती है। यदि धारा 24-बी के तहत मिलने वाली छूट में इजाफा होता है, तो सुस्त पड़े हाउसिंग मार्केट में फिर से जान आ सकती है। इससे न केवल घर खरीदारों को फायदा होगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र से जुड़े लाखों मजदूरों और अन्य उद्योगों को भी काम मिलेगा, जो अंततः देश की जीडीपी की
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण पर जोर
Budget 2026बजट केवल शहरों तक सीमित नहीं रहने वाला है क्योंकि ग्रामीण भारत की क्रय शक्ति बढ़ाना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उम्मीद की जा रही है कि पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली सालाना राशि में भी कुछ बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसके अलावा कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर और खाद सब्सिडी को लेकर भी बड़े आवंटन की संभावना जताई जा रही है। अगर ग्रामीण क्षेत्रों में पैसा पहुंचता है, तो उसका सीधा असर एफएमसीजी सेक्टर पर पड़ता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था का चक्र सुचारू रूप से घूमने लगता है। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्री इन तमाम उम्मीदों और राजकोषीय घाटे के बीच कैसे संतुलन बैठाती हैं।



