Big breaking: आसाराम पर यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद बरकरार, कोर्ट ने कहा- तुरंत सरेंडर करें – RGH NEWS
देश

Big breaking: आसाराम पर यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद बरकरार, कोर्ट ने कहा- तुरंत सरेंडर करें

Big breaking स्वयंभू बाबा आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया है लेकिन उसमें गैंगरेप वाली धाराएं हटा दी गई हैं। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा है कि आसाराम फौरन सरेंडर करे

जोधपुर: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे स्वयंभू बाबा आसाराम को कोर्ट से बड़ा झटका मिला है और कोर्ट ने उसे फौरन सरेंडर करने के लिए कहा है। बता दें कि आसाराम इस समय पैरोल पर जेल से बाहर निकला हुआ था लेकिन कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के बाद उसे फौरन सरेंडर करने के लिए कहा है।

 

 

कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी

राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने आसाराम की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि उसकी सजा में गैंगरेप के चार्ज हटा दिए गए हैं। अन्य गंभीर आरोपों में दोषसिद्धि और सजा को पहले के जैसा ही रखा है। कोर्ट का आदेश है कि आसाराम फौरन सरेंडर करे।

 

 

Read more Loan New Rules: इस प्राइवेट बैंक ने ग्राहकों को दिया झटका, लोन के नए नियमों में किया बड़ा बदलाव..

क्या है पूरा मामला?

नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। हालांकि अदालत ने उसे गैंगरेप के आरोप से राहत प्रदान की है। वहीं मामले में सह-आरोपी शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और शरतचंद को बरी कर दिया गया।

 

राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने अंतिम बहस पूरी होने के बाद 20 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह मामला वर्ष 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि जोधपुर स्थित आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया गया। इसके बाद देशभर में मामला सुर्खियों में आ गया था।

 

जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी मानते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को भी 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा दी थी।

 

ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए तीनों आरोपियों ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान शिल्पी और शरतचंद को जमानत पर रिहा कर दिया था, जबकि आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में ही बंद रहा।

 

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया था कि मामले में गैंगरेप और मानव तस्करी जैसे आरोप साबित नहीं होते हैं तथा कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अभियोजन के दावों का समर्थन नहीं करते।

 

वहीं अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्य आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में मुख्य आरोपी आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, लेकिन गैंगरेप से जुड़े आरोपों में राहत दी। अदालत ने सह-आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए जाने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।

 

फैसले के बाद अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। उल्लेखनीय है कि आसाराम वर्ष 2013 से जोधपुर जेल में बंद था। बाद में सुप्रीम कोर्ट से उसे स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत मिली थी। राजस्थान हाई कोर्ट ने भी मेडिकल ग्राउंड पर उसकी अंतरिम जमानत को समय-समय पर बढ़ाया था।

 

Big breakingफरवरी 2026 में राजस्थान हाई कोर्ट ने इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू की थी और स्पष्ट कहा था कि सुनवाई के दौरान किसी भी प्रकार का स्थगन स्वीकार नहीं किया जाएगा। करीब एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस चर्चित मामले पर आज आए फैसले के बाद अब सभी की नजरें संभावित सुप्रीम कोर्ट अपील पर टिकी हुई हैं। (रिपोर्ट- चंद्रशेखर व्यास)

Related Articles

Back to top button