Bhupesh Baghel: भूपेश बघेल समेत कांग्रेस के 3 नेताओं पर असम CM हिमंता ने ठोका 500 करोड़ का मानहानि केस

Bhupesh Baghel असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता पूर्व सीएम भूपेश बघेल, जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई के खिलाफ मानहानि का केस किया है, जिसमें 500 करोड़ के हर्जाने की मांग की गई है। सीएम सरमा ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए तीनों नेताओं ने जानबूझकर उनके खिलाफ झूठे और बदनाम करने वाले आरोप लगाए।
गौरतलब है कि 4 फरवरी को असम कांग्रेस के प्रेसिडेंट गौरव गोगोई ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार ने राज्य में करीब 12,000 बीघा जमीन पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर लिया है, जो 3,960 एकड़ से ज्यादा एरिया में फैला है। सीएम सरमा को हाल ही में धार्मिक भेदभाव को लेकर दिए गए अपने बयानों के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों और सिविल सोसाइटी के अलग-अलग तबकों की आलोचना का सामना करना पड़ा है।
जमीन से जुड़े आरोप सामने आने के बाद यह मुद्दा गरमा गया है। इन आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री सरमा ने साफ कहा है कि वे गौरव गोगोई समेत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी मानहानि का केस चलाएंगे। इस बीच गोगोई ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री के इस कदम को घबराहट का संकेत बताया है। उन्होंने X पर लिखा कि अगर मुख्यमंत्री में हिम्मत है तो उन्हें कोर्ट में खुलकर लोगों का सामना करना चाहिए।
नरसंहार भड़काने का आरोप
Bhupesh Baghelगौरव गोगोई ने सोमवार को एक अन्य प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री पर अपने वीडियो के माध्यम से मुसलमानों के खिलाफ “नरसंहार भड़काने” का भी आरोप लगाया था और पुलिस से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। कथित तौर पर इस वीडियो में सीएम सरमा एक राइफल से दो तस्वीरों पर निशाना साधते दिख रहे थे। इनमें से एक तस्वीर में व्यक्ति ने टोपी पहनी थी और दूसरे की दाढ़ी थी। वीडियो का कैप्शन “पॉइंट-ब्लैंक शॉट” दिया गया था। गोगोई ने कहा, “मुख्यमंत्री एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर नफरत फैला रहे हैं। यह सीधे तौर पर नरसंहार को बढ़ावा देना है।” उन्होंने सीएम के ‘मियां’ समुदाय के खिलाफ दिए गए हालिया बयानों की भी निंदा की। कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री की योग्यता पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ काम कर रहे हैं। जब वे कांग्रेस में थे, तब ‘धर्मनिरपेक्ष’ होने का दिखावा करते थे, लेकिन अब वे केवल राजनीति कर रहे हैं।



