आखिर क्यों लगातार बदले जा रहे अस्पताल में खाना देने वाले ठेकेदार,पढ़ें पूरी खबर RGHNEWS के साथ – RGH NEWS
रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

आखिर क्यों लगातार बदले जा रहे अस्पताल में खाना देने वाले ठेकेदार,पढ़ें पूरी खबर RGHNEWS के साथ

अब तक अधिकारियों से सांठगांठ कर खाने में खूब हुई धांधली मेडिकल कॉलेज में सालों से जमे ठेकेदार की कई बार हुई शिकायत

RGHNEWS प्रशांत तिवारी रायगढ़। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सालों से जमे भोजन के ठेकेदार पर अब तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कोई कार्यवाही नहीं किया। अगले के द्वारा कई बार मरीजों के खाने में गड़बड़ी की शिकायत मरीजों के द्वारा ही की गई है इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज के डीन और अस्पताल अधीक्षक इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं। अब जब जिला प्रशासन स्वयं मॉनिटरिंग कर रहा है तब 3 दिन के भीतर 2 के ठेकेदार को बदले जा चुके हैं। अधिक मूल्य लेकर कम और घटिया सामग्री लगाने वाले इन ठेकेदार पर उचित कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनने के पूर्व जिला अस्पताल के समय से आज तक केशरवानी ग्रुप ही अस्पताल में मरीजों को खाना उपलब्ध कराकर मनमाना बिल ले रहा है। जिसमें जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी कुछ हिस्सा बनता रहा है जिस कारण इतने वर्षों से यही ठेकेदार ठेका पा रहा है।कई बार कीड़े युक्त भोजन, घटिया सामग्री से तैयार भोजन,साफ सफाई का अभाव, कर्मचारियों द्वारा मरीज के साथ शराब पी कर दुर्व्यवहार जैसी शिकायत हो चुकी है।हाल में ही अस्पताल के डायटिशियन के साथ सुपरवाइजर द्वारा बदसलूकी की बात भी सामने आई थी इतना सबकुछ होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ठेकेदार पर मेहरबानी बरसा रहा है। मरीजों को बिना डाइट चार्ट के अनुसार मनमाना भोजन देकर बिल पास करा लिया जाता है इसी तरह एक अन्य ठेकेदार स्थानीय है जिसे मेडिकल कॉलेज के कई ऐसे काम जिनका टेंडर तक नहीं निकाला जाता है और ठेका हितैषी ठेकेदार को मिल जाता है। बीते बर्ष अस्पताल के स्टैंड ठेका मे गड़बड़ी को लेकर महिला ठेकेदार ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर आरोप भी लगाया था। मेडिकल कॉलेज में उक्त ठेकेदार द्वारा ही समय पर हाउस किपिंग, गार्ड और अन्य ठेका कर्मचारी को कभी भुगतान नहीं होने की शिकायत कई बार हुई लेकिन कार्रवाई के नाम पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन गूंगा बहरा दोनों बन जाता है।

मेडिकल कॉलेज में डीएम का हस्तक्षेप आवश्यक
मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जिला कलेक्टर का हस्तक्षेप होना आवश्यक है क्योंकि मेडिकल कॉलेज के ज्यादातर काम राजधानी से संचालित होने के कारण जिला प्रशासन को जानकारी नहीं हो पाती है। जिस कारण आम जनता को होने वाली समस्या का समाधान नहीं हो पाता है। स्थानीय स्तर पर समस्या को दबा दिया जाता है और आगे बात पहुंचाने में आम आदमी सक्षम नहीं है जिस कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाता है।

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