राजनीतिक

भाजपा की अंदरुनी कलह फिर आई सामने,उपासने का आरोप,पढ़ें पूरी खबर

RGHNEWS प्रशांत तिवारी  रायपुर। विधानसभा चुनाव में सत्तारुढ़ दल भाजपा की हार से मचा बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पार्टी में नेताओं के भीतर चल रहा मतभेद और विवाद रह-रहकर सामने आता रहता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत की रायपुर यात्रा के साथ एक बार फिर नेताओं के भीतर पड़ी चिन्गारी फिर से सुलग उठी और जो विवाद पार्टी की दीवारों के भीतर टकराकर शांत हो जाता था, अब वह शोले बनकर सोशल मीडिया के जरिये बाहर आऩे लगे हैं। इस विवाद की आंच छोटे नेताओं से लेकर अब पार्टी के बड़े नेताओं को झुलसाने में लगी है।

सच्चिदानंद उपासने द्वारा सोशल मीडिया में की गई टिप्पणी के जवाब में पूर्व विधायक और पार्टी प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी ने भी उपासने को चुनौति दे डाली है। सुंदरानी ने उपासने को उनके द्वारा की गई टिप्पणी के लिए खेद व्यक्त करने, एक तौर पर माफी मांगने कहा है। उन्होंने कहा कि वे उन पर लगाए आरोप को सिद्ध कर दें तो वे राजनीति से हमेशा के लिए सन्यास ले लेंगे नहीं तो वो खेद व्यक्त करें।

ये हैं वो आरोप-प्रत्यारोप

भाई सुंदरानी जी से यह अपेक्षा नहीं थी कि वे सार्वजनिक रूप से मेरी माताजी ताई जी,बड़े भैया जगदीश जी व पूरे परिवार के बारे में इस बोलें,जबकि ताई ने ही उन्हें उंगली पकड़ राजनीति सिखाई। हमारे परिवार ने कभी चाहा नहीं हाँ अन्याय बर्दास्त नहीं किया क्यों कि आपातकाल में भी सारे उपासने परिवार ने अन्याय के खिलाफ 21 माह लड़ाई लड़ी,माताजी ने भी ढाई साल विधायक बन कोई व्यापार नही किया न किसी बेटे को नौकरी लगाई,रिक्शे में घूमकर ही जनता के काम करती थी,केंद्रीय निर्णय के बाद जब सभी विधायकों को जो सरकार भंग के समय थे,टिकट देनी थी तब भी ताईजी को स्थानीय नेतृत्व ने गुटबाजी तहत टिकट नहीं वह अन्याय भी उन्होंने सह पार्टी का जब तक शरीर ने साथ दिया काम किया,विरोध नही किया अटल जी ने भी इस अन्याय को माना था। बड़े भैया अपनी प्रतिभा से वहां तक पहुंचे राजनीतिक टेके से नहीं, सुंदरानी जी। कृपया गलत जानकारी न दें। मुझे भी निश्चित ही पार्टी ने बहुत कुछ देना चाहा पर बाकी सब पब्लिक व कार्यकर्ता जानते हैं। आपने तो विपरीत समय में पार्टी ही छोड़ दी थी,और मेरे जिला टीम में जब हम सब कार्यकर्ता जोगी सरकार को सत्ता से हटाने रोज डंडे खा रहे थे ,जेल जा रहे थे, जमानतें करवा न्यायालय के चक्कर लगा रहे थे तब आपने यह कहकर मेरा व्यापार है जोगी जी नुकसान कर सकते हैं,कोषाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था,और आप विधायक भी बने न ,वह मेरी व कार्यकर्ताओं की परोसी थाली ही थी, जो आपको जातिगत आधार पर मिली आप उसे भी स्थायी नहीं कर पाए। मैं दुखी हूँ, आपके व्यक्तिगत आरोपों से व कार्यकर्ता भी।

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