लिव इन में रहने के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन? जानिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला…

Live-in Relationship Registration Case सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा यह कैसी याचिका है, कौन करेगा ये? तब याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.बीते कुछ महीनों में लिव इन रिलेशनशिप के दौरान लड़कियों की हत्याएं हो गई. इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इसमें मांग की गई थी कि लिव इन में रहने वाले कपल का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया जाए. सर्वोच्च न्यायालय ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है.
वकील ममता रानी ने दायर की थी याचिका
ये जनहित याचिका एडवोकेट ममता रानी से दायर की थी. जिसमें कहा गया ता कि जैसे शादी का रजिस्ट्रेशन होता है वैसा ही लिव इन रिलेशनशिप में भी कराया जाए. और इसको अनिवार्य किया जाए. इस याचिका में वकील ने श्रद्धा वालकर, निक्की यादव समेत कई उदाहरण भी दिए थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने सवाल किया कि ऐसा करेगा कौन.?
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
Live-in Relationship Registration Caseसुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. बहस भी हुई. याचिकाकर्ता की मांग थी कि लिव इन में रहने वाले कपल का भी रजिस्ट्रेशन कराया जाए. आसान भाषा में आपको समझाएं तो जैसे आप किराए पर मकान लेते हैं तो एक रेंट एंग्रीमेंट होता है. इसमें पुलिस वेरिफिकेशन की भी आवश्यकता होती है. उसी तरह एक रजिस्ट्रेशन की मांग की गई थी. ताकि लड़का और लड़की के बारे में पूरी जानकारी सरकार के पास रहे.



