जानें बागेश्वर धाम सरकार के ‘दिव्य दरबार’ की असली सच्चाई….

Chhattisgarh News: देश में इन दिनों बागेश्वर धाम सरकार के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Bageshwar Dham Maharaj Dhirendra Krishna Shastri) सुर्खियों में हैं. नागपुर (Nagpur) में उठे सवाल के बाद अंधविश्वास का ठप्पा लगाया जा रहा था. इसका धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कड़ा जवाब दिया है. दरअसल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दिव्य दरबार में आज उन्होंने प्रमाण के रूप में मीडिया के सामने कई अनजान लोगों के बारे में लगातार सही सही जानकारी अर्जी में पहले से लिख कर दे दी. इसे देख कर सभी दंग रह गए.
दिव्य दरबार में शास्त्री ने लगाई अर्जी
दरअसल शुक्रवार को दिव्य दरबार सुबह 11 बजे के आस पास शुरू हुआ. गद्दी में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बैठे. इसके बाद अर्जी लगाने का दौर शुरू हो गया. गद्दी में बैठे शास्त्री ने लाखों की भीड़ से श्रद्धालुओं को उनके नाम से बुलाया, लेकिन दिव्य दरबार की असली कहानी की तलाश करने पहुंचा एबीपी न्यूज़ वो हर गुंजाइश तलाशने में लगा था कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कही हर बात सही है या नहीं. दिव्य दरबार में अंतिम अर्जी एबीपी न्यूज के पत्रकार ज्ञानेंद्र तिवारी की लगी. इसके बाद जो हुआ वो अब सोशल मीडिया में वायरल हो गया है.
पत्रकार-शास्त्री के बीच सवाल जवाब
दरअसल मंच से धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आप पत्रकारों में जिस पत्रकार के चाचा का नाम भृगुनाथ तिवारी हो वो आ जाए. तब एबीपी न्यूज के पत्रकार ज्ञानेंद्र तिवारी ने जवाब दिया. जी हां चाचा भोपाल के हैं और अभी मथुरा में रहते हैं. इसके बाद फिर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पूछा कि क्या तुम्हारे भाई का नाम राघवेंद्र तिवारी है? क्या तुम्हारे भाई ने मकान बनवाया है? इसका जवाब भी सही निकला. दो दिन पहले ही बड़े भाई राघवेंद्र तिवारी ने नए घर में गृहप्रवेश किया है. इसके बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ज्ञानेंद्र तिवारी की भतीजी का नाम भी सही बताया. अर्जी का एक और पन्ना जो धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पहले से लिखकर रखा था.
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कैसे लगती है दिव्य दरबार में अर्जी
Chhattisgarh News गौरतलब है कि दिव्य दरबार में अक्सर दूर दूर से आए श्रद्धालुओं की अर्जी लगती है. लाखों की भीड़ से किसी एक को नाम और वेशभूषा से पुकार कर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मंच पर बुलाते है. उनके आते ही एक कागज पर आने व्यक्ति की पूरी कुंडली लिख देते हैं कि क्या समस्या है? घरवाले और आस पास वाले क्या कहते हैं वो सब जानकारी जो केवल जिसकी अर्जी लगी हो उसी को पता हो. इसे चेक करने के लिए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जिसकी अर्जी लगी है उससे पूछते भी हैं कि आपने आयोजन समिति या किसी को पंडाल में आने के बाद अपने बारे में जानकारी तो नहीं दी है. इसके बाद ही पर्चे पर लिखी जानकारी को अर्जी वाले को पढ़ने के लिए कहते हैं.



