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आम लोगों के लिए खुशखबरी! खाने का तेल हुआ सस्ता…

Edible Oil Rates विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन सहित लगभग सभी तेल-तिलहनों की कीमतों में गिरावट रही. बाजार सूत्रों ने कहा कि सरकार के आयातित तेलों पर शुल्क लगाये जाने के कयास से मलेशिया एक्सचेंज में 1.25 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में 0.12 प्रतिशत की गिरावट रही.

 

सूत्रों ने कहा कि देश में सस्ते आयातित तेलों की भरमार है और सरसों की आगामी फसल काफी बेहतर होने की उम्मीद है. यानी पहले के बचे हुए स्टॉक को आगामी फसल से मिलाकर, देश में लगभग 125 लाख टन का सरसों तिलहन का स्टॉक हो जायेगा. सोयाबीन के साथ साथ सरसों के खपने की मुश्किलों को देखते हुए कम से कम सूरजमुखी जैसे हल्के तेलों पर आयात शुल्क अधिकतम सीमा तक बढ़ाकर लगाया जाना चाहिये. ऐसी स्थिति में ही हमारे देशी सोयाबीन और सरसों की खपत हो पायेगी.

 

सोयाबीन के 10 लाख टन की अधिक पेराई हुई

कच्चा पामतेल की खपत गरीब उपभोक्ताओं में होती है, इसलिए उसके आयात शुल्क में मामूली वृद्धि भी की जाये तो गरीबों को तेल सस्ता ही मिलने का अनुमान है. लेकिन नरम तेलों (सॉफ्ट आयल) पर अधिकतम सीमा तक आयात शुल्क लगाना फौरी जरुरत है. सूत्रों के अनुसार देश के एक प्रमुख तेल संगठन का कहना है कि वर्ष 2021 के अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के मुकाबले वर्ष 2022 के समान महीनों में सोयाबीन के 10 लाख टन की अधिक पेराई हुई. ऐसे में इस तेल संगठन को यह भी बताना चाहिये कि वर्ष 2022 के अक्टूबर नवंबर के मात्र दो महीनों में सभी खाद्यतेलों के आयात में लगभग छह लाख टन यानी करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि क्यों हुई है?

 

इस पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है

वर्ष 2021 के नवंबर-दिसंबर में सभी खाद्यतेलों का आयात 24 लाख टन का हुआ था जो वर्ष 2022 के नवंबर-दिसंबर में करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 30.11 लाख टन हो गया. सूत्रों ने कहा कि कुछेक अन्य तेल संगठनों का मानना है कि देश में तेल पेराई करने वाले मिलों को पेराई में लगभग 5-6 रुपये किलो का नुकसान है. यानी मिल वालों को तिलहन ऊंचे दाम पर मिलते हैं और तेल के बाजार के दाम कहीं नीचे हैं. सस्ते आयातित तेलों की वजह से तेल के थोक दाम टूटे हुए हैं. ऐसे में देश के तिलहन उत्पादक किसानों के फसल कैसे खपेंगे इस पर गंभीरता से विचार करने की जरुरत है.

 

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इससे खाद्यतेलों की महंगाई भी थमेगी

Edible Oil Rtaes सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से सभी तेल कंपनियों को नियमित रूप से हर महीने अपने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की जानकारियां सरकारी वेबसाइट पर डालने का निर्देश देना चाहिये. वेबसाइट पर जानकारियां सार्वजनिक होने से सरकार तेल कीमतों की घट बढ़ और तेल कंपनियों द्वारा खाद्यतेल के मूल्य में कमी और बढ़ोतरी का जब चाहे जायजा ले सकेगी और इससे खाद्यतेलों की महंगाई भी थमेगी.

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