अब लोगों के व्यवहार में दिखने लगा दिनचर्या में ग्रीनचर्या अभियान, वैवाहिक वर्षगांठ पर गुलदस्ता के स्थान पर पौधा देकर दी शुभकामना – RGH NEWS
रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

अब लोगों के व्यवहार में दिखने लगा दिनचर्या में ग्रीनचर्या अभियान, वैवाहिक वर्षगांठ पर गुलदस्ता के स्थान पर पौधा देकर दी शुभकामना

RGHNEWS PRASHANT TIWARI प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल और उनके समर्थक युवाओं द्वारा चलाए जा रहे दिनचर्या में ग्रीन चर्या अभियान को अब लोग अपने व्यवहार में प्रयोग करने लगे हैं इसका ताजा उदाहरण विगत दिनों किरोड़ीमल नगर में देखने को मिला जब यहां के युवा व्यवसायी विकास शर्मा के वैवाहिक वर्षगांठ पर उनके शुभचिंतक मित्रों ने उन्हें गुलदस्ता के बजाय पौधे भेंट कर शुभकामना दिया।

विदित हो कि किरोड़ीमल नगर निवासी युवा व्यवसायी विकास शर्मा के विवाह वर्षगांठ पर उनके मित्रों ने गुलदस्ता के स्थान पर पौधा भेंटकर दिनचर्या में ग्रीनचर्या अभियान को आत्मसात करते हुए इसे जन आंदोलन का रूप देने का श्रीगणेश किया । इस अवसर पर प्रतिष्ठित व्यवसायी गण आनंद केडिया, गोविंद अग्रवाल, जय अग्रवाल , प्रबोध जगतरामका, उमाकांत सामंत रे ने किरोड़ीमल पहुंचकर उनके निवास पर गुलदस्ता भेंटकर विवाह के वर्षगांठ की शुभकामना दी। प्रतिष्ठित जनों का मानना है कि मंत्री उमेश पटेल के आह्वान पर हम लोगों ने गुलदस्ता के स्थान पर पौधा भेंटकर विवाह वर्षगांठ की शुभकामना दी क्योंकि शुभ अवसरों पर हम गुलदस्ता के स्थान पर पेड़ पौधा भेंट करें तो यह अभियान जमीनी स्तर पर व्यवहार में उतरेगा। उक्त जानकारी कोतरा रोड रायगढ़ के प्रतिष्ठित व्यवसायी आनंद केडिया राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी भोजराम पटेल को देते हुए बताया कि राजनीति से परे जब कोई भी व्यक्ति अच्छा काम करता है तो उसे हमें आत्मसात करना चाहिए अपने जीवन में उतारना चाहिए और दूसरों को भी इस विषय पर प्रेरित भी करना चाहिए इसी उद्देश्य से हमने दिनचर्या में ग्रीनचर्या को रायगढ़ के पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्ति की दिशा में एक अच्छा पहल मानते हुए इसे आत्मसात किया है।युवा व्यवसायी विकास शर्मा ने भी अपने मित्रों की इस भावना का विशेष रूप से सम्मान करते हुए भेंट में दिए गए पौधों को सुरक्षित और संवर्धित करने का संकल्प लिया। दिनचर्या में ग्रीनचर्या को अब आम व खास लोग युवा मंत्री उमेश पटेल के अपील पर आत्मसात कर व्यवहार देने लगे हैं जो इस अभियान की जमीनी स्तर तक लोगों में स्वीकार्यता का प्रमाण है।

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