cancer : कैंसर क्या होता है , इसके लक्षण और बचाव
कैंसर क्या होता है
cancer : कैंसर नाम सुनते ही लोगों में खौफ बन जाता है। शरीर के विभिन्न हिस्सों में कैंसर हो सकता है। कई बार यह जानलेवा हो जाता है।
कैंसर, किसी कोशिका के असामान्य तरीके से बढ़ने की बीमारी है. आमतौर पर, हमारे शरीर की कोशिकाएं नियंत्रित तरीके से बढ़ती हैं और विभाजित होती हैं.
जब सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है या कोशिकाएं पुरानी हो जाती हैं, तो वे मर जाती हैं और उनकी जगह स्वस्थ कोशिकाएं ले लेती हैं. कैंसर में कोशिका के विकास को नियंत्रित करने वाले संकेत ठीक से काम नहीं करते हैं. कैंसर की कोशिकाएं बढ़ती रहती हैं और जब उन्हें रुकना चाहिए तो कई गुना बढ़ जाती हैं.
कैंसर के लक्षण
कैंसर के सही लक्षणों की पहचान तो डॉक्टर ही कर सकता है। पर लगातार वजन घटना, बुखार का बना रहना, भूख में लगातार कमी, गले में खराश, थूक में खून आना, किसी घाव का लगातार बना रहना या सामान्य संक्रमण से बार-बार पीडि़त होना, ऐसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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ऐसे लक्षण आने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्तन कैंसर की जांच के लिए महिलाओं को घर पर ही अपने स्तन की बारीकी से जांच करनी चाहिए। स्तन में गांठ या किसी स्थान पर लगातार कड़ापन लगातार बना रहे, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
कुछ आम तौर पर पाये जाने वाले कैंसर
पुरूषः- मूंह, गला, फेंफडे, भोजन नली, पेट और पुरूष ग्रन्थी (प्रोस्टेट)
महिलाः- बच्चेदानी का मुंह, स्तन, मुंह, गला, ओवरी
कैंसर से बचाव के उपाय
- cancer : प्रारम्भिक अवस्था में कैंसर के निदान के लिए निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान दें
- मूंह में सफेद दाग या बार-बार होने वाला घाव।
- शरीर में किसी भी अंग या हिस्से में गांठ होने पर तुरन्त जांच करवायें।
- महिलायें माहवारी के बाद हर महीने स्तनों की जॉंच स्वयं करे स्तनों की जॉंच स्वयं करने का तरीका चिकित्सक से सीखें।
- दो माहवारी के बीच या माहवारी बन्द होने के बाद रक्त स्त्राव होना खतरे की निशानी है पैप टैस्ट करवायें।
- शरीर में या स्वास्थ्य में किसी भी असामान्य परिवर्तन को अधिक समय तक न पनपने दें।
- नियमित रूप से जॉंच कराते रहें और अपने चिकित्सक से तुरन्त सम्पर्क करें।
- याद रहे- प्रारम्भिक अवस्था में निदान होने पर ही सम्पूर्ण उपचार सम्भव है।
- धूम्रपान, तम्बाकु, सुपारी, चना, पान, मसाला, गुटका, शराब आदि का सेवन न करें।
- विटामिन युक्त और रेशे वाला ( हरी सब्जी, फल, अनाज, दालें) पौष्टिक भोजन खायें।
- कीटनाशक एवं खाद्य संरक्षण रसायणों से युक्त भोजन धोकर खायें।
- अधिक तलें, भुने, बार-बार गर्म किये तेल में बने और अधिक नमक में सरंक्षित भोजन न खायें।
- अपना वजन सामान्य रखें।
- नियमित व्यायाम करें नियमित जीवन बितायें।
- साफ-सुथरे, प्रदूषण रहित वातावरण की रचना करने में योगदान दें।



