कोविड की तीसरी लहर से लड़ने के लिए क्या तैयार है भारत?

साउथ अफ्रीका (South Africa) में मिले कोरोना वायरस (Coronavirus) के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) से दुनिया के कई देशों में दहशत का माहौल है. आनन-फानन में कई मुल्कों ने दक्षिण अफ्रीका के साथ लगी अपनी सीमाओं को सील कर दिया है साथ ही अफ्रीकी देशों से आने वाले लोगों के लिए नियमों को सख्त कर दिया है. वहीं कुछ देशों ने अफ्रीकी देशों से आने वाले नागरिकों पर ट्रैवल बैन लगा दिया है. अब तक यह वेरिएंट 12 देशों में मिल चुका है. हालांकि भारत में इस वेरिएंट के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक और चंडीगढ़ में साउथ अफ्रीका से लौटे लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर चिंता बढ़ गई है. इन लोगों के टेस्ट सैंपल जिनोम सिक्वेंसिंग के भेज दिए गए हैं.
ओमिक्रॉन के संभावित खतरे के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर देश में इस वेरिएंट की वजह से कोरोना की तीसरी लहर आती है तो इससे मुकाबले के लिए हमारी क्या तैयारी है. भारत में डेल्टा वेरिएंट की वजह से इस साल मार्च, अप्रैल और मई में कोरोना की दूसरी लहर आई थी जिसने काफी तबाही मचाई थी. आलम यह था कि अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे थे, एंबुलेंस और जीवनरक्षक दवाइयों की भारी कमी देखने को मिली थी. वहीं शमशान घाटों और कब्रिस्तान में शवों की लाइन लग गई थी. डेल्टा वेरिएंट का पहला केस महाराष्ट्र में मिला था और अब मेडिकल एक्सपर्ट कह रहे हैं कि ओमिक्रॉन वेरिएंटडेल्टा से ज्यादा घातक हो सकता है.
कौन ज्यादा घातक: ओमिक्रॉन या डेल्टा?
देश में ओमिक्रॉन वेरिएंट से अब तक कोई मौत नहीं हुई है हालांकि अथॉरिटी फिर भी अलर्ट हैं और अपनी तैयारियों में लगी हुई है. वहीं दूसरी ओर, कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा वेरिएंट के कहर और स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी और पर्याप्त तैयारी नहीं होने की वजह से हजारों लोगों की जान चली गई थी. मई में डेल्टा वेरिएंट के सबसे ज्यादा केस दर्ज हुए थे, जब देश में कोविड-19 वैक्सीनेशन ने रफ्तार नहीं पकड़ी थी.
हालांकि मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी होने की संभावना कम है क्योंकि ज्यादातर भारतीयों में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है. नेशनल सीरो सर्वे के अनुसार देश में वयस्कों की एक बड़ी आबादी का कोविड-19 वैक्सीनेशन हो चुका है.
ओमिक्रॉन खतरे के बीच सतर्कता बढ़ाई गई
ओमिक्रॉन वेरिएंट से लड़ने के लिए भारत ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. केंद्र सरकार ने 15 दिसंबर से विदेश यात्राओं को फिर से बहाल करने के फैसले पर रोक लगा दी है. इसके अलावा उच्च जोखिम वाले देशों से आने वाले नागरिकों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है और सभी विदेशी यात्रियों की टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है. इस बीच वैक्सीनेशन की रफ्तार को भी बढ़ा दिया गया है. महाराष्ट्र में नवंबर महीने में 8.3 लाख लोगों का टीकाकरण हुआ है. जबकि राज्य की 40 फीसदी आबादी पूरी तरह सेवैक्सीनेटेड है.
वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ओमिक्रॉन वेरिएंट और कोरोना संक्रमण के खतरे से निपटने के लिए 2 सप्ताह के अंदर दिल्ली में 63,800 बेड्स तैयार करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली में 30 हजार ऑक्सीजन बेड उपलब्ध हैं जिनमें से 10 हजार बेड्स आईसीयू की सुविधा के साथ उपलब्ध हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने जोर देते हुए कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर काफी सजग रहने की जरुरत है और इसके लिए विदेशी यात्रियों पर कड़ी नजर रखनी होगी ताकि देश में इस वेरिएंट के संक्रमण का खतरा पैदा न हो. बीबीसी की एक रिपोर्ट में डॉ चंद्रकांत लहरिया ने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को एकसमान अनुपात में बढ़ाने की जरुरत है ताकि हर आपात स्थिति से निपटा जा सके. उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट में 50 के करीब म्यूटेशन है जिसकी वजह से यह वेरिएंट तेजी से फैलता है.



