*✍️JRD टाटा का पहला ‘प्यार’ था एयर इंडिया…..जानिए ये ‘प्रेम कहानी’…..*

Why JRD Tata Established Airlines In 1930s: करीब 100 साल पहले का एक दिन. भारत के एक सबसे बड़े उद्योगपति का 15 वर्षीय बेटा उत्तरी फ्रांस में समंदर किनारे गर्मियों की छुट्टियां बिता रहा होता है. तभी समंदर किनारे पानी की तहत पर एक विमान उतरता है. उस विमान को देखकर वह किशोर हैरान हो जाता है. वह उसी समय अपने शहर बाम्बे में भी कुछ ऐसा करने की ठान लेता है. लेकिन उम्र कम होने की वजह से वह उस काम को पूरा नहीं कर पाता. करीब 9 साल बाद जब वह 24 साल की उम्र में पहुंचता है तो उसके सामने अपने ‘प्यार’ को हासिल करने के लिए पूरा आसमान होता है और फिर वह…
जी हां… यही है देश के जाने माने उद्योगपति स्वर्गीय जेआरडी टाटा की एयर इंडिया एयरलाइंस स्थापित करने की कहानी. जेआरडी के लिए एयर इंडिया कोई कंपनी नहीं बल्कि उनका पहला प्यार था और वह अपनी पूरी उम्र अपने इस प्यार को सहेजने में लगे रहे.
यूं आया एयरलाइंस की स्थापना का विचार
जेआरडी द्वारा टाटा एयरलाइंस की स्थापना की यह कहानी खुद टाटा समूह ने अपनी वेबसाइट पर साझा की है. आपको जानकार हैरानी होगी की जेआरडी टाटा को आसमान में पक्षियों की तरह दूरियां मापने का इतना शौक था कि उन्होंने देश के पहले कमर्शियल पायलट होने का लाइसेंस हासिल किया.वेबसाइट के मुताबिक 20वीं सदी के पहले दशक में एक बार गर्मियों की छुट्टी बिताने किशोर जेआरडी टाटा उत्तरी फ्रांस के बॉलोग्नी (Boulogne) गए थे. वहां उनके साथ उनका एक दोस्त था. वह दोस्त कोई और नहीं बल्कि 1909 में इंग्लिश चैनल की उड़ान भरने वाले महान लुईस ब्लेरियॉट ( Louis Bleriot) का बेटा था.
ये दोनों लड़के समंदर किनारे खेल रहे थे तभी ब्लेरियॉट के मुख्य पायलट बीच की रेतीली धरती पर एक विमान से उतरे. यह कारनाम देखकर जेआरडी टाटा हैरान रह गए. इस एडवेंचर ने उनकी जिंदगी पर बेहद गहरा असर डाला और उन्होंने उसी समय कुछ ऐसा ही करने की ठान ली. उन्होंने उसी समय पायलट बनने तय किया. हालांकि इसके लिए जेआरडी को नौ सालों तक इंतजार करना पड़ा. जब वह 24 साल के हुए तो बाम्बे यानी आज के मुंबई में एक प्लाइंग क्लब की स्थापना हुई और वह वहां से बाकायदा पायलट बनने वाले पहले भारतीय बने.
बने पहले कमर्शियल पायलट
इसके बाद इस पायलट ने भारत से इंग्लैंड तक अकेल विमान उड़ाने का चैलेंज पार किया और फिर देश के पहले टाटा एयरलाइंस की स्थापना की. उन्होंने 1932 में टाटा एयरलाइंस की पहली उड़ान भरी. वह पहली उड़ान कराची से मुंबई की थी. देश की आजादी से एक साल पहले वर्ष 1946 में टाटा एयरलाइंस का नाम एयर इंडिया कर दिया गया.कंपनी बनने के दूसरे साल में ही कमाया 10 हजार का मुनाफा
टाटा एयरलाइंस जेआरडी के दिल के एक टुकड़े जैसा था. उनके लिए यह केवल कोई दिखावा नहीं था, बल्कि वह टाटा एयरलाइंस को दुनिया के आसमान पर राज करते देखना चाहते थे. इस एयरलाइंस को शुरू करने के मात्र दो साल के भीतर उन्होंने इसे फायदे में पहुंचा दिया. उनकी यह सफतला आज की तारीख में भी काफी मायने रखती है. टाइम्स ऑफ इंडिया लिखे एक लेख में विक्रम डॉक्टर बताते हैं कि उस वक्त के भारत में नागरिक उड्डयन के महानिदेशक फ्रेडेरिक टाइमस (Frederick Tymms) ने कहा था कि पूरी दुनिया में बिना किसी सरकारी सहयोग के चलने वाली किसी एयरलाइंस के फायदे में होने यह पहली घटना था.