रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Raigarh News : पटवारियों की हड़ताल के बीच जिला प्रशासन ने पूरा कराया धान के रकबे का सत्यापन, 98 प्रतिशत पॉलीगॉन जनरेशन का कार्य पूरा

राजस्व निरीक्षकों, सर्वेयरों, कोटवारों और किसानों के सहयोग से मौके पर हुआ भौतिक सत्यापन, 5 तहसीलों में शत-प्रतिशत कार्य पूरा

Raigarh News :  रायगढ़, 29 अक्टूबर 2026/ पटवारियों की हड़ताल के बीच रायगढ़ जिला प्रशासन ने धान के रकबे के भौतिक सत्यापन का काम लगभग पूरा कर लिया है। जिस काम में पटवारियों की भूमिका को अहम माना जाता है, उसे राजस्व विभाग ने राजस्व निरीक्षकों, सर्वेयरों, कोटवारों और किसानों के सहयोग से आगे बढ़ाते हुए उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। जिले में निर्धारित 1 लाख 52 हजार 49 धान खसरों में से 1 लाख 48 हजार 773 से अधिक का पॉलीगॉन जनरेशन पूरा हो चुका है। इस तरह 98 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। शेष खसरों का पीवी भी पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

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जिले में पटवारियों की हड़ताल के बीच किसानों के धान विक्रय की प्रक्रिया प्रभावित न हो और वास्तविक रकबे का सत्यापन समय पर हो सके, इसके लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मैदानी अमले को सक्रिय किया। तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और सर्वेयरों ने गांवों में पहुंचकर किसानों तथा कोटवारों के सहयोग से खेतों की पहचान की और भौतिक सत्यापन का कार्य किया। समन्वित प्रयास और तकनीक के उपयोग से इस महत्वपूर्ण कार्य को पटवारियों की अनुपस्थिति में भी पूरा किया गया।

*किसान की मौजूदगी में खेत की पहचान, फिर तैयार हुआ पॉलीगॉन*

धान के रकबे का सत्यापन केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि खेतों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की गई। थर्ड पार्टी सर्वेयरों को संबंधित खसरों की जानकारी देकर मौके पर भेजा गया। गांव के कोटवारों ने खेत और उसके मालिक की पहचान कराने में मदद की। इसके बाद किसानों से संपर्क कर उन्हें अपने खेत तक बुलाया गया। किसानों ने स्वयं अपने खेत की सीमा बताई, जिसके आधार पर सर्वेयरों ने मौके पर पॉलीगॉन तैयार किया और धान से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज की। इस प्रक्रिया में किसान की प्रत्यक्ष भागीदारी से खेत की पहचान की पुष्टि हुई, वहीं स्थानीय कोटवार के सहयोग से भी जानकारी का मिलान किया गया। इससे सर्वेयरों को सही खेत तक पहुंचने और वास्तविक स्थिति के अनुरूप पॉलीगॉन तैयार करने में मदद मिली।

*राजस्व नक्शे और गूगल मैप के मिलान से सटीकता पर जोर*

भौतिक सत्यापन को अधिक सटीक बनाने के लिए तहसीलों में राजस्व नक्शों का गूगल मैप से मिलान भी किया गया। इससे संबंधित खसरे की वास्तविक भौगोलिक स्थिति समझने और मौके पर सही खेत तक पहुंचने में सहायता मिली। मैदानी सत्यापन, किसान की पुष्टि, कोटवार के सहयोग और नक्शे के मिलान कर त्रुटिरहित बनाने का प्रयास किया गया। यह प्रक्रिया डीसीएस के दूसरे चरण के अंतर्गत की जा रही है। पहले चरण में डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से गिरदावरी का कार्य किया जाता है, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए संबंधित खसरों की मौके पर जाकर पहचान और भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत सर्वेयरों की मदद से पॉलीगॉन तैयार किए जा रहे हैं।

*27 राजस्व निरीक्षक और 1,385 सर्वेयर मैदान में सक्रिय*

इस अभियान में 27 राजस्व निरीक्षकों और लगभग 1,385 सर्वेयरों ने मैदानी स्तर पर काम किया। इसके साथ ही 900 से अधिक कोटवारों ने गांवों में खेतों और खसरों की पहचान कराने में सहयोग दिया। तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति की निगरानी की, जबकि अनुविभागीय अधिकारियों ने भी मैदानी कार्यों की समीक्षा की। जिला स्तर पर अपर कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्री हेमेन्द्र भूआर्य सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की। प्रतिदिन शेष कार्यों की समीक्षा कर संबंधित क्षेत्रों में टीमों को सक्रिय किया गया, ताकि जहां काम बाकी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन पूरा कराया जा सके।

*पांच तहसीलों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल*

जिले की पांच तहसीलों ने निर्धारित धान खसरों के पॉलीगॉन जनरेशन का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इनमें घरघोड़ा, धरमजयगढ़, पुसौर, मुकडेगा और रायगढ़ तहसील शामिल हैं। घरघोड़ा में 6 हजार 91, धरमजयगढ़ में 15 हजार 458, पुसौर में 34 हजार 128, मुकडेगा में 1 हजार 577 और रायगढ़ में 28 हजार 800 खसरों का काम पूरा हो चुका है। अन्य तहसीलों में भी काम तेजी से आगे बढ़ा है। खरसिया में 99.40 प्रतिशत, लैलूंगा में 98.76 प्रतिशत, तमनार में 98.67 प्रतिशत और छाल में 90.02 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। कापू में 84.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। जिले के 902 गांवों में सत्यापन कार्य किया गया है, जबकि व्यापक अभियान में 938 गांव शामिल रहे हैं।

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*किसानों को समय पर धान बेचने में परेशानी न हो, प्रशासन का फोकस*

जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वास्तविक धान रकबे का सत्यापन करते हुए किसानों के हितों की रक्षा करना है। पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना धान उपार्जन केंद्रों में बेच सकें, इसे ध्यान में रखकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी, कोटवारों की स्थानीय जानकारी, सर्वेयरों की तकनीकी सहायता और राजस्व अधिकारियों की निगरानी से काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया गया है। प्रशासन शेष खसरों का सत्यापन पूरा कर प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने में जुटा है। यह कार्य भी शीघ्र पूरा हो जाएगा।

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