रायगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Raigarh News : भाजपा के राज में गरीबों के हिस्से में परेशानी और पूंजीपतियों पर मेहरबानी : शाखा यादव

Raigarh News :  रायगढ़। जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष शाखा यादव ने भाजपा सरकार पर गरीब, मध्यमवर्गीय और जरूरतमंद परिवारों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार की विकास के दावे संबंधी प्रचार और आम जनता की वास्तविक परिस्थितियों के बीच गहरी खाई दिखाई दे रही है। एक ओर भाजपा सरकार विकास कार्यों की तेज रफ्तार, विकास की बारिश,विकास कार्यों सौगातों की जुमलेबाजी से उपलब्धियों का प्रचार करने में लगातार जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर गरीब परिवार अपनी पेंशन, राशनकार्ड और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान हो रहे हैं। सरकार के कामकाज का आंकलन विज्ञापनों और भाषणों से किया गया प्रचार से नहीं, आम आदमी के जीवन में आए बदलाव से होना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां भाजपा सरकार की विफलताओं को प्रदर्शित कर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

शाखा यादव ने कहा कि विधवा, दिव्यांग और निराश्रित पेंशन पिछले तीन महीने से लंबित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसका कारण केंद्र सरकार से मिलने वाली 500 रुपये की राशि का आवंटन रुकना बताया जा रहा है जो डबल इंजन,ट्रिपल इंजन की सरकार के लिए बहुत ही शर्मनाक बात है। विडंबना देखिए कि जिन लोगों के लिए पेंशन ही भोजन, दवा और रोजमर्रा की जरूरतों का सहारा है, उन्हें अपने ही हक की सहायता राशि के लिए बार-बार भटकना पड़ रहा है। इससे पहले भी लगभग नौ महीने तक पेंशन लंबित रहने की स्थिति निर्मित हुई थी। तब जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पेंशन बहाल करने की मांग की, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस को रायगढ़ विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री के निवास कार्यालय का घेराव करना पड़ा। इसके बाद ही पेंशन बहाल हो सकी थी। अब फिर वही स्थिति सामने आ रही है। सवाल यह है कि क्या गरीबों और जरूरतमंदों को उनका हक दिलाने के लिए हर बार आंदोलन करना पड़ेगा? क्या सरकार की जिम्मेदारी केवल बड़े-बड़े दावे करना ही रह गया है, या गरीबों को उनके हक का लाभ समय पर पहुंचाना भी है?

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की नीतियों में गरीबों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती। एक ओर बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को हजारों करोड़ रुपये की कर्जामाफी किए जाने के मामले सामने आते हैं, दूसरी ओर गरीबों की पेंशन और राशन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए राशि तथा व्यवस्था का अभाव बताया जाता है। आखिर आर्थिक संसाधनों के उपयोग में प्राथमिकता किसे मिलनी चाहिए? उन लोगों को, जिनके पास संकट से उबरने के अनेकों साधन हैं, या उन जरूरतमंदों को जिनके लिए कुछ सौ रुपये भी पूरे महीने का सहारा होते हैं? भाजपा सरकार को इस सवाल का जवाब देना चाहिए।

शाखा यादव ने कहा कि राशनकार्ड बनवाने और परिवार के सदस्यों के नाम जुड़वाने की प्रक्रिया भी इतनी जटिल हो गई है कि पात्र हितग्राही आवश्यक दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रियाओं में उलझकर रह जा रहे हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित जरूरतमंदों के लिए आधे घंटे में बीपीएल राशनकार्ड बनवाने की व्यवस्था का लाभ मिलता था, ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। वर्तमान भाजपा सरकार के समय स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। बीपीएल पात्रता के लिए निर्धारित मापदंडों में छह लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय और एक हजार वर्गफुट के मकान जैसी शर्तों के आधार पर परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इन मानदंडों के कारण वास्तविक जरूरतमंद परिवारों की पात्रता प्रभावित हो रही है या नहीं, इसकी गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बीपीएल कार्ड के माध्यम से पांच लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा पाने वाले परिवार का नाम एपीएल सूची में चले जाने पर यदि उसे केवल 50 हजार रुपये तक की सहायता मिलती है, तो गंभीर बीमारी की स्थिति में उस परिवार के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा होना स्वाभाविक है। महंगाई के इस दौर में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले ही अपनी आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी नियमों की जटिलता के कारण यदि पात्र परिवार इलाज की पर्याप्त सुविधा से वंचित होते हैं, तो यह भाजपा सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को सहायता देने के बजाय उसे पात्रता के प्रमाण जुटाने और दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर करना किसी भी जनकल्याणकारी सरकार की पहचान नहीं हो सकती।

शाखा यादव ने बिजली बिल के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का लगभग दस हजार रुपये तक बिजली बिल बकाया होने पर कनेक्शन काटे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। दूसरी ओर बड़े पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को मिलने वाली वित्तीय रियायतों तथा कर्ज माफी को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठते रहे हैं। आखिर गरीब परिवार की आर्थिक मजबूरी को समझने में सरकार को इतनी परेशानी क्यों होती है? जो परिवार महंगाई, बेरोजगारी और सीमित आमदनी के बीच किसी तरह अपना घर चला रहा है, उसके सामने बिजली कनेक्शन कटने का संकट खड़ा हो जाना उसके पूरे परिवार को अंधेरे में धकेलने जैसा है। यदि भाजपा सरकार और उसके मंत्री वास्तव में गरीबों के हितैषी हैं, तो उन्हें जरूरतमंद बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए विधायक व मंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि का उपयोग भी बंदरबांट करने के बजाय पारदर्शी तरीके से वास्तविक गरीब,जरूरतमंद बिजली बकायादारों की सहायता के लिए भी किया जाना चाहिए, ताकि पात्र परिवारों को बिजली बिल चुकाने में मदद मिल सके और आर्थिक कठिनाई के कारण उन्हें घर की रोशनी से वंचित न होना पड़े।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की विकास संबंधी प्रचार तब तक सार्थक नहीं हो सकतीं, जब तक गरीबों की पेंशन समय पर नहीं मिलती, पात्र परिवारों के राशनकार्ड सहजता से नहीं बनते, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं मिलती और आर्थिक तंगी के कारण गरीब परिवारों के बिजली कनेक्शन कटने की नौबत आती रहती है। विकास का अर्थ केवल सड़कों, भवनों और योजनाओं के आंकड़े प्रस्तुत करना नहीं है; विकास का वास्तविक अर्थ यह भी है कि आम आदमी का जीवन पहले से अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक बने।

शाखा यादव ने कहा कि भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि गरीबों के अधिकार कोई सरकारी एहसान नहीं हैं। पेंशन पात्र हितग्राही का अधिकार है, राशनकार्ड जरूरतमंद परिवार के लिए सरकारी सुविधाओं तक पहुंचने का माध्यम है और बिजली जैसी बुनियादी आवश्यकता के मामले में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देना सरकार की सामाजिक जिम्मेदारी है। इन अधिकारों और सुविधाओं के लिए जनता को बार-बार संघर्ष करना पड़े, तो सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

भाजपा सरकार को अब प्रचार की चमक से बाहर निकलकर जनता की परेशानियों का सामना करना चाहिए। जिस प्रदेश में विधवा अपनी पेंशन के लिए इंतजार करे, गरीब परिवार इलाज की सुविधा पाने के लिए राशनकार्ड की जटिलताओं में उलझा रहे और मध्यमवर्गीय परिवार अप्रत्याशित बिजली बिल के कारण अंधेरे में रहने की आशंका से घिरा हो, वहां विकास के दावों की सच्चाई की पोल खुलते दिखाई देती है। कांग्रेस गरीबों और जरूरतमंदों की आवाज उठाती रहेगी और सरकार को उसके दायित्वों की याद दिलाती रहेगी। जनता को विकास के खोखले प्रचार नहीं, समय पर पेंशन, सहज सरकारी प्रक्रियाएं, सुलभ इलाज और आर्थिक संकट में वास्तविक राहत चाहिए। भाजपा सरकार को तय करना होगा कि उसकी प्राथमिकता आम जनता का जीवन आसान बनाना है या केवल अपनी उपलब्धियों का प्रचार करना।

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