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Steel Price: 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा स्टील का भाव, 75,000 रुपये प्रति टन तक पहुंची कीमतें

Steel Price कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और मानसून के बाद मांग बढ़ने की वजह से देश में स्टील की कीमतें 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। मार्केट रिसर्च फर्म बिगमिंट के मुताबिक, स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, खासकर कोकिंग कोल महंगा होने की वजह से स्टील की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फर्म ने एक रिपोर्ट में बताया कि चालू वित्त वर्ष की बाकी तिमाहियों में भी स्टील की कीमतों में तेजी का रुख जारी रहने की उम्मीद है।

 

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75,000 रुपये प्रति टन तक पहुंची स्टील की कीमतें

बिगमिंट के आंकड़ों के अनुसार, देश में हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतें 64,000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड कॉइल (CRC) की कीमतें 75,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई हैं। बताते चलें कि हॉट रोल्ड कॉइल और कोल्ड रोल्ड कॉइल दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली सबसे आम फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स हैं। इससे पहले, स्टील के इस तरह के दाम जून 2022 में देखे गए थे।

 

अगस्त में 66,500 रुपये प्रति टन थीं कोल्ड रोल्ड कॉइल की कीमतें

1 अगस्त से हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतों में 6000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड कॉइल की कीमतों में 8500 रुपये प्रति टन की भारी बढ़ोतरी हुई है। इस साल, अगस्त की शुरुआत में हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें 58,000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड कॉइल की कीमतें 66,500 रुपये प्रति टन थीं।

 

 

एक महीने में करीब 65 डॉलर प्रति टन महंगा हुआ कोकिंग कोल

बिगमिंट के एक एनालिस्ट ने कहा कि स्टील की कीमतों में ये उछाल मुख्य रूप से प्रमुख कच्चे माल की लागत बढ़ने और मांग में तेजी के कारण आया है। इंपोर्ट किए जाने वाले कोकिंग कोल की कीमत सिर्फ एक महीने में करीब 65 डॉलर प्रति टन बढ़कर 305 डॉलर प्रति टन हो गई है। वहीं, दूसरी ओर आयरन ओर फाइन्स की कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और ये 4500 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया है।

 

स्टील की कीमतों में फिलहाल कमी की कोई संभावना नहीं

Steel Price फर्नेस रूट से स्टील उत्पादन की लागत में सिर्फ कोकिंग कोल की 30 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2027 के अप्रैल-अगस्त के दौरान भारत में स्टील की खपत 70 MT तक पहुंच गई, जिसमें साल-दर-साल 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भविष्य को लेकर बिगमिंट ने कहा कि वित्त वर्ष के बाकी समय में कीमतों में कमी आने की संभावना नहीं है क्योंकि कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों सेक्टरों से मांग जारी रहने की उम्मीद है।

 

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