Chakradhar Samaroh 2026: महाराजा चक्रधर सिंह की ‘चंद्रबदनी’ पर डॉ. यास्मीन सिंह की शानदार कथक प्रस्तुति

Chakradhar Samaroh 2026: रायगढ़, 16 सितम्बर 2026/ चक्रधर समारोह-2026 की सांस्कृतिक संध्या में डॉ. यास्मीन सिंह ने कथक की शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की वंदना, ‘गोविंदा गोपाला’, ‘झूला गीत’, ‘द्रौपदी’ और महाराजा चक्रधर सिंह की प्रसिद्ध रचना ‘चंद्रबदनी’ को कथक के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति की शुरुआत ‘दिव्य कृष्ण’ से हुई। भगवान श्रीकृष्ण की वंदना में भक्ति और आध्यात्मिक भावों को कथक की भाव-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुत किया गया। इसके बाद ‘गोविंदा गोपाला’ में श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण के भाव दिखाई दिए।
‘झूला गीत’ में राधा-कृष्ण की प्रेमलीला और प्रकृति की सुंदरता को नृत्य के माध्यम से साकार किया गया। वहीं ‘द्रौपदी’ में महाभारत के उस प्रसंग को प्रस्तुत किया गया, जिसमें द्रौपदी और भगवान श्रीकृष्ण के सखा-सखी के रिश्ते, विश्वास और निष्ठा को भावपूर्ण ढंग से दर्शाया गया। प्रस्तुति का विशेष आकर्षण महाराजा चक्रधर सिंह की प्रसिद्ध रचना ‘चंद्रबदनी’ रही। ‘चंद्रबदनी, मृगलोचनी, दामिनी, दुति गोरी, अलबेली नवल नार, करति चित की चोरी…’ जैसे भावपूर्ण शब्दों को कथक की नृत्य-भंगिमाओं के साथ प्रस्तुत करते हुए डॉ. यास्मीन सिंह ने महाराजा चक्रधर सिंह की रचना और रायगढ़ घराने की समृद्ध कथक परंपरा को मंच पर जीवंत किया।
डॉ. यास्मीन सिंह ने 10 वर्ष की आयु में इंदौर के गुरु श्री मधुकर जगताप से कथक की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद लखनऊ घराने के प्रसिद्ध गुरु पंडित अर्जुन मिश्रा से प्रशिक्षण लिया। उन्होंने रायगढ़ घराने की विशिष्ट बंदिशों, रचनाओं और शैली का अध्ययन प्रो. मांडवी सिंह के सानिध्य में किया। उनकी प्रस्तुति में कथक की शास्त्रीयता के साथ भाव, अभिनय और लय का सुंदर समन्वय देखने को मिला।