Raigarh News : सीआईएसएफ जवानों को साइबर ठगी के नए तरीकों से किया जागरूक, थाना प्रभारी घरघोड़ा ने बताए बचाव के उपाय
फर्जी KYC से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक, साइबर फ्रॉड के नए तरीकों की दी जानकारी

Raigarh News : *13 अगस्त, रायगढ़* । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन एवं एडिशनल एसपी श्री अनिल सोनी के मार्गदर्शन में साइबर अपराधों से बचाव को लेकर रायगढ़ पुलिस द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना घरघोड़ा क्षेत्र अंतर्गत तिलाईपाली स्थित CISF कैंप में घरघोड़ा पुलिस द्वारा कल साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में CISF कंपनी के अधिकारियों एवं जवानों को वर्तमान में सामने आ रहे साइबर फ्रॉड के नए तरीकों की जानकारी देते हुए उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए गए।

थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने बताया कि आज तकनीक का उपयोग हमारी दैनिक जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। मोबाइल बैंकिंग, UPI, ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी में अपराधी अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, TRAI, बिजली विभाग, कूरियर कंपनी, रिश्तेदार या परिचित बनकर फोन करते हैं और डर या लालच पैदा कर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
कार्यक्रम में फर्जी KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने का झांसा, बिजली कनेक्शन काटने की धमकी, फर्जी कूरियर पार्सल, OLX/ऑनलाइन खरीद-बिक्री के नाम पर ठगी, फर्जी निवेश एवं ट्रेडिंग एप, QR कोड और UPI फ्रॉड, फर्जी लोन एप, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, OTP एवं स्क्रीन शेयरिंग के जरिए ठगी के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। जवानों को समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV, बैंक पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। UPI PIN पैसा प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है, इसलिए किसी के कहने पर पैसे प्राप्त करने के नाम पर UPI PIN डालने से बचना चाहिए।
अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के संबंध में भी जवानों को विशेष रूप से जागरूक किया गया। बताया गया कि अपराधी वीडियो कॉल पर पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को किसी अपराध में फंसाने की धमकी देते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। पुलिस या कोई सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर बैंक खाते में पैसे जमा कराने का निर्देश नहीं देती। ऐसे किसी कॉल पर घबराने के बजाय तत्काल कॉल काटकर संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।
इसी तरह फर्जी लिंक और APK फाइल से होने वाली ठगी से बचाव के लिए बताया गया कि मोबाइल पर आए किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और WhatsApp या अन्य माध्यम से प्राप्त संदिग्ध APK फाइल को इंस्टॉल न करें। साइबर अपराधी ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर बैंकिंग एवं निजी जानकारी तक पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, निजी फोटो-वीडियो साझा करने और संदिग्ध वेबसाइटों पर व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने से भी सावधान रहने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में AI आधारित आवाज एवं वीडियो, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और परिचित व्यक्ति बनकर पैसे मांगने वाले मामलों को लेकर भी जागरूक किया गया। जवानों को बताया गया कि केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा न करें। यदि कोई परिचित अचानक पैसे की मांग करता है तो उसके पुराने या वैकल्पिक नंबर पर कॉल कर वास्तविकता की पुष्टि करें।

साइबर ठगी होने की स्थिति में बिना देर किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने तथा www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही बैंक खाते से संबंधित लेन-देन की जानकारी सुरक्षित रखने और पुलिस को उपलब्ध कराने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित CISF अधिकारियों एवं जवानों ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप और उनसे बचाव के उपायों को गंभीरता से समझा तथा कार्यक्रम को उपयोगी बताया। रायगढ़ पुलिस द्वारा आम नागरिकों के साथ-साथ शासकीय विभागों, सुरक्षा बलों एवं विभिन्न संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर डिजिटल सुरक्षा के प्रति लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।



