CG Public Holiday Tomorrow: छत्तीसगढ़ सरकार का ऐलान, कल बंद रहेंगे सभी सरकारी दफ्तर और स्कूल-कॉलेज – RGH NEWS
छत्तीसगढ़ न्यूज़ (समाचार)

CG Public Holiday Tomorrow: छत्तीसगढ़ सरकार का ऐलान, कल बंद रहेंगे सभी सरकारी दफ्तर और स्कूल-कॉलेज

CG Public Holiday Tomorrow अगस्त का महीना स्कूली बच्चों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आई है। इस महीने हर सप्ताह बच्चों एक सार्वजनिक अवकाश की सौगात मिलने वाली है। इसकी शुरुआत 12 अगस्त से हो रही है। इसी सप्ताह स्वतंत्रता दिवस भी मनाएं जाएंगे। इसके अलावा इसी महीने में रक्षा बंधन पर्व भी मनाएं जाएंगे। इसी बीच छत्तीसगढ़ में भाजपा की साय सरकार ने 12 अगस्त को पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश (Chhattisgarh Holiday List 2026) का ऐलान किया है।

 

Holiday on 12 August हरेली पर्व के चलते इस दिन प्रदेशभर के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल समेत सभी कॉलेज, सरकारी दफ्तर व बैंक भी बंद रहेंगे। बताया जा रहा है कि बुधवार को प्रदेशभर में धूमधाम से हरेली पर्व मनाया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री निवास में भी हरेली पर्व को लेकर खास आयोजन किया जाएगा।

 

क्यों खास है हरेली त्योहार

CG Public Holiday Tomorrow सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली पर्व (Hareli Festival 2026) के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधि युक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।

 

CG Public Holiday Tomorrowसावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है। हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। (

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