Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी आज, नोट करें शुभ मुहूर्त, पारण की टाइमिंग

Devshayani Ekadashi 2026 आषाढ़ शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार को श्रद्धालु देवशयनी एकादशी का व्रत रखेंगे। इसी दिन से सनातन परंपरा में चातुर्मास का शुभारंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु इस दिन क्षीरसागर में चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं।
इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं। जिले के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
धर्मशास्त्र विशेषज्ञ पं. मिथलेश पांडेय ने बताया कि देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होने वाला चातुर्मास आत्मसंयम, साधना और ईश्वर भक्ति का विशेष काल माना जाता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, जिसके बाद पुनः सभी शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं।
चातुर्मास के दौरान श्रद्धालु जप, तप, व्रत, दान-पुण्य, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक समय देते हैं। इस अवधि में किसी एक बुरी आदत या प्रिय खाद्य पदार्थ का त्याग करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
व्रत के दिन चावल का सेवन वर्जित…
व्रत के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में पीले वस्त्र, पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं।
देवशयनी एकादशी को लेकर जिले के राम-जानकी मंदिर, हजियापुर मंदिर, गौरा मठ, पकड़ियार, बथना, बंगरा, अमवां-विजयपुर तथा बरौली के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर समितियों ने व्यापक तैयारियां की हैं
एकादशी तिथि: शुक्रवार सुबह 9:12 बजे से शनिवार सुबह 11:34 बजे तक।
पूजा का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 1:11 बजे तक।
व्रत पारण: 26 जुलाई 2026 को सुबह 6:13 बजे से 8:50 बजे के बीच।
चातुर्मास का समापन: 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन, जिसके बाद तुलसी विवाह एवं सभी मांगलिक कार्य पुनः आरंभ होंगे।
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