Chhattisgarh news: छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को बड़ी राहत, महंगाई राहत के लिए अब नहीं लेनी होगी दूसरे राज्य की मंजूरी – RGH NEWS
छत्तीसगढ़ न्यूज़ (समाचार)

Chhattisgarh news: छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को बड़ी राहत, महंगाई राहत के लिए अब नहीं लेनी होगी दूसरे राज्य की मंजूरी

Chhattisgarh news मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब महंगाई राहत (डीआर) जारी करने के लिए दोनों राज्यों को एक-दूसरे की सहमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों ने इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है, जिससे पेंशनर्स को समय पर महंगाई राहत का लाभ मिल सकेगा।

 

17 जुलाई 2026 से लागू माना जाएगा आदेश

 

दोनों राज्य सरकारों ने प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने और पेंशनर्स को राहत देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। जारी आदेश को 17 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इससे महंगाई राहत जारी करने में होने वाली अनावश्यक देरी खत्म होने की उम्मीद है।

 

अब क्या बदलेगा?

 

वित्त विभाग के आदेश के अनुसार, अब महंगाई राहत बढ़ाने के लिए दूसरे राज्य की मंजूरी लेना आवश्यक नहीं होगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ अपनी-अपनी ओर से स्वतंत्र रूप से कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे।हालांकि, दोनों राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा तय दर से अधिक महंगाई राहत देने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, महंगाई राहत बढ़ाने से पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार की जानकारी दूसरे राज्य को पत्र के माध्यम से देनी होगी।

 

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने जताया आभार

 

इस फैसले का पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने स्वागत किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी। इस संबंध में एसोसिएशन ने जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की थी।

 

महंगाई राहत को लेकर हाईकोर्ट में लंबित है मामला

 

आमोद सक्सेना के अनुसार, मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा-49 को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट में मामला विचाराधीन है। संगठन का कहना है कि अधिनियम में कहीं भी दूसरे राज्य की सहमति लेने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन पिछले करीब 25 वर्षों से इसी आधार पर महंगाई राहत जारी करने में देरी होती रही।

 

81 महीने के बकाया महंगाई राहत की भी मांग

 

एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी और भोपाल जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने सरकार से 81 महीने के बकाया महंगाई राहत (डीआर) का भुगतान जल्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से भुगतान में देरी के कारण पेंशनर्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए बकाया राशि शीघ्र जारी की जानी चाहिए।

 

एमपी में 19 हजार और छत्तीसगढ़ में 7 हजार पुराने पेंशनर्स

 

मध्यप्रदेश पेंशन विभाग के दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 4.40 लाख से अधिक पेंशनर्स हैं। इनमें 1 नवंबर 2000 से पहले के करीब 19 हजार पेंशनर्स शामिल हैं, जो कुल संख्या का लगभग 4 प्रतिशत हैं।वहीं, छत्तीसगढ़ में ऐसे पेंशनर्स की संख्या करीब 7 हजार है। इस तरह दोनों राज्यों में कुल लगभग 26 हजार पुराने पेंशनर्स हैं और समय के साथ इनकी संख्या लगातार घट रही है।

 

बंटवारे के बाद रिटायर हुए 4.13 लाख कर्मचारी

 

रिकॉर्ड के अनुसार, 1 नवंबर 2000 के बाद मध्यप्रदेश में 4.13 लाख से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, जो कुल पेंशनर्स का लगभग 96 प्रतिशत हैं। ये उत्तरवर्ती पेंशनर्स हैं, जिन पर अविभाजित मध्यप्रदेश के नियम लागू नहीं होते। इसके बावजूद इन्हें भी महंगाई राहत जारी करने की समान प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा था।

 

 

 

हाईकोर्ट में चुनौती के बाद बदली व्यवस्था

 

वर्ष 2024 में मध्यप्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि राज्य विभाजन के समय जारी सर्कुलर में 1 नवंबर 2000 के बाद सेवानिवृत्त मध्यप्रदेश के पेंशनर्स को इस व्यवस्था में शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं था।साथ ही, सर्कुलर में महंगाई राहत के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति लेने का भी कहीं उल्लेख नहीं किया गया था।

 

हाईकोर्ट ने भी पूछा था- सहमति क्यों जरूरी?

 

याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की पीठ ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभागों से जवाब मांगा था। अदालत ने पूछा था कि महंगाई राहत जारी करने से पहले दूसरे राज्य की सहमति लेना क्यों आवश्यक है। हालांकि, अब तक इस संबंध में संयुक्त जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

 

राज्य पुनर्गठन अधिनियम की जानकारी भी मांगी

 

Chhattisgarh newsपेंशनर्स एसोसिएशन ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 से संबंधित जानकारी भी मांगी थी, लेकिन अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद संगठन ने केंद्रीय सूचना आयोग में दूसरी अपील दायर की है।

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