Income Tax Rule: कृषि भूमि बेचने पर भी देना होता है टैक्स? जान लीजिए Income Tax का नया नियम – RGH NEWS
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Income Tax Rule: कृषि भूमि बेचने पर भी देना होता है टैक्स? जान लीजिए Income Tax का नया नियम

Income Tax Rule अक्सर शादी-ब्याह, घर बनाने या किसी इमरजेंसी के समय लोगों को अपनी खेती की जमीन बेचनी पड़ती है। लेकिन जमीन बेचने के बाद मिलने वाले पैसों पर टैक्स देना होगा या नहीं, यह सवाल हर किसी के मन में आता है। कई लोग सही जानकारी के अभाव में या तो अनावश्यक टैक्स भर देते हैं या फिर नियमों को समझ नहीं पाते। अगर आप भी खेती की जमीन बेचने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले इन आयकर नियमों को जरूर समझ लें।

 

क्या खेती की जमीन पर लगता है टैक्स?

खेती की जमीन पर टैक्स लगेगा या नहीं, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जमीन ग्रामीण है या शहरी। आयकर कानून के अनुसार, ग्रामीण कृषि भूमि को कैपिटल एसेट नहीं माना जाता। इसका मतलब साफ है कि अगर आपकी जमीन गांव की सीमा में आती है, तो उसे बेचने पर आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। वहीं, अगर जमीन शहरी क्षेत्र में आती है, तो उसे बेचने पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना अनिवार्य होता है।

 

कैसे तय होगा जमीन ग्रामीण है या शहरी?

यह समझना बहुत जरूरी है कि आपकी जमीन किस कैटेगरी में आती है। अगर जमीन किसी ऐसी नगरपालिका में है जिसकी आबादी 10,000 या उससे ज्यादा है, तो वह शहरी जमीन मानी जाएगी। अगर जमीन शहर की सीमा से 2 से 8 किलोमीटर के दायरे में आती है, तो भी वह शहरी जमीन के दायरे में आ सकती है। ऐसे मामलों में जमीन बेचने से होने वाला लाभ कैपिटल गेन कहलाता है और उस पर टैक्स लगता है।

 

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शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन क्या है?

अगर आपने शहरी खेती की जमीन खरीदी और 2 साल के अंदर बेच दी, तो उस पर होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) कहलाता है। इस पर आपकी इनकम के अनुसार टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। वहीं, अगर जमीन को 2 साल से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचा जाए, तो यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है। इस पर आमतौर पर 20% टैक्स लगता है और इसमें इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलता है।

 

टैक्स बचाने के आसान और कानूनी तरीके

Income Tax Ruleधारा 54B का फायदा: अगर आप जमीन बेचकर 2 साल के भीतर दूसरी कृषि भूमि खरीद लेते हैं, तो आपको टैक्स में छूट मिल सकती है।

धारा 54EC के तहत निवेश: आप अपने मुनाफे को सरकारी बॉन्ड्स जैसे NHAI या REC में निवेश कर सकते हैं। अधिकतम ₹50 लाख तक निवेश पर टैक्स छूट मिलती है और निवेश अवधि 5 साल होती है।

धारा 54F का विकल्प: अगर आप जमीन बेचकर घर खरीदना चाहते हैं, तो इस धारा के तहत भी टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है।

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