Health tips: दही या छाछ: गट हेल्थ के लिए कौन-सा ऑप्शन है ज्यादा बेस्ट? दूर करें कन्फ्यूजन

Health tips भारत में पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), एसिडिटी, ब्लोटिंग, गैस और अपच जैसी दिक्कतें अब आम हो चुकी हैं। इन समस्याओं के कारण न सिर्फ पेट में ऐंठन और बेचैनी होती है, बल्कि रोज़मर्रा की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। ऐसे में जब पेट खराब होता है तो अक्सर सवाल उठता है एक कटोरी दही खाएं या एक गिलास छाछ पिएं? दोनों ही भारतीय खानपान का अहम हिस्सा हैं और पाचन के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन सही चुनाव आपकी समस्या पर निर्भर करता है।
दही और छाछ की न्यूट्रिशन वैल्यू
दही में भरपूर मात्रा में प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। यह प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन बी से भरपूर होता है। वहीं छाछ दही को पानी मिलाकर बनाई जाती है। यह दही से हल्की और पतली होती है, इसलिए पेट पर कम भारी पड़ती है। इसमें फैट की मात्रा कम होती है और यह शरीर को हाइड्रेट भी करती है। अक्सर इसमें जीरा, हींग या पुदीना जैसे पाचक मसाले मिलाए जाते हैं, जो गैस और ब्लोटिंग कम करने में मदद करते हैं।
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गट हेल्थ पर दही और छाछ से कैसा असर पड़ता है?
दही: दही आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद करता है। यह कब्ज से राहत दिला सकता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। जिन लोगों को प्रोटीन की जरूरत ज्यादा होती है या जिन्हें लंबे समय तक पेट भरा रखना हो, उनके लिए दही बेहतर विकल्प हो सकता है।
छाछ: छाछ हल्की, ठंडी और हाइड्रेटिंग होती है। अगर पेट भारी लग रहा हो, एसिडिटी हो रही हो या ब्लोटिंग की समस्या हो, तो छाछ ज्यादा राहत दे सकती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स और पानी की मात्रा पाचन को आसान बनाते हैं।
किस समस्या में क्या बेहतर?
Health tipsअगर किसी को इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम है, तो हल्की और ठंडी छाछ ज्यादा आराम दे सकती है। ब्लोटिंग या गैस की समस्या में मसालेदार छाछ फायदेमंद होती है। वहीं कब्ज की स्थिति में सादा दही ज्यादा असरदार माना जाता है। अगर शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन और पोषण की जरूरत हो, तो दही बेहतर विकल्प है। यानी दही और छाछ दोनों ही गट हेल्थ के लिए लाभकारी हैं, लेकिन इनका चुनाव आपकी पाचन स्थिति पर निर्भर करता है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Rgh किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)



