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India America Tarde Deal: अमेरिकी ट्रेड डील पर कांग्रेस का संसद पर घमासान, किसान MSP से कम दाम में इस फसल को बेचने पर मजबूर

India America Trade Deal भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक अनुबंध को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ सड़क से संसद तक मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि, सरकार की ट्रेड पॉलिसी का नुकसान राज्य के किसानों को झेलना पड़ेगा। (India America Tarde Deal News) खासकर सोयाबीन आयल और कैटल फ़ूड पर दी गई राहत से कांग्रेस आगबबूला है।

 

आज इस पूरे मुद्दे पर राजयसभा में कांग्रेस सांसदों ने फिर से सवाल उठाये और केंद्र सरकार की घेराबंदी की। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद अशोक सिंह ने कहा कि, भारत-अमेरिका डील मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। एक तरफ जहां राज्य का सोयाबीन किसान लागत नहीं निकाल पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार अमेरिका से सोयाबीन तेल और अनाज आयात करने के लिए दरवाजे खोल रही है।

 

2025-26 के लिए सरकार ने सोयाबीन MSP 5,300 रुपए तय किया था लेकिन किसान अपनी फसल तय MSP से काफी कम दाम में बेचने को मजबूर हैं। ये समझौता किसानों के साथ धोखा है। अमेरिका से सस्ता सोयाबीन तेल भारत में आने के बाद यहां का किसान तबाह हो जाएगा। मेरी मांग है कि अमेरिका से सोयाबीन के आयात पर तुरंत रोक लगाई जाए।”

 

ट्रेड डील पर सरकार का पक्ष क्या है?

इस पूरे मामले पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत ने व्यापार समझौतों में हमेशा उन क्षेत्रों को लेकर ‘‘स्पष्ट सोच’’ रखी है जो देश के लिए ‘‘बेहद’’ संवेदनशील हैं और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में ऐसे सभी प्रमुख क्षेत्रों की पूरी तरह रक्षा की गई है। (India America Tarde Deal News) उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष संयुक्त बयान को कानूनी समझौते में बदलने पर काम कर रहे हैं जिसे मार्च के अंत तक अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।

 

अग्रवाल ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ भारत ने हमेशा सभी समझौतों पर स्पष्ट सोच के साथ बातचीत की है। जो भी क्षेत्र भारत के लिए बेहद संवेदनशील हैं, जहां हमें लगता है कि हमारे किसान, मछुआरे, दुग्ध क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, वहां हमने अपने साझेदार देशों को साफ बता दिया है कि भारत ऐसे मामलों में बाजार नहीं खोल सकता या पहुंच नहीं दे सकता।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘ अगर आप पिछले एक साल में किए गए सभी समझौतों को देखें। हमने पांच व्यापार समझौते किए हैं। सभी में संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की गई है। अमेरिका के साथ भी सभी प्रमुख संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। (India America Tarde Deal News) जहां थोड़ी संवेदनशीलता थी, वहां हमने शुल्क दर ‘कोटा’ व्यवस्था का इस्तेमाल किया ताकि बाजार तक पहुंच सीमित रहे और हमारे किसानों पर असर न पड़े।

 

क्या है भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक अनुबंध?

इस महीने की शुरुआत में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे संवेदनशील कृषि एवं दुग्ध उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा है। इन वस्तुओं पर अमेरिका को कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है। ये उत्पाद संवेदनशील माने जाते हैं क्योंकि इनका सीधा संबंध देश के छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका से है। अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में भी भारत ने ऐसे उत्पादों पर आयात शुल्क में कोई रियायत नहीं दी है। हाल ही में भारत ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ एफटीए को अंतिम रूप दिया है।

 

कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियां जैसे पशुपालन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनसे 50 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में जहां कृषि अत्यधिक मशीनीकृत और कॉरपोरेट आधारित है, वहीं भारत में यह करोड़ों लोगों की आजीविका का प्रश्न है। भारतीय कृषि क्षेत्र को वर्तमान में घरेलू किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए मध्यम से उच्च शुल्क और विभिन्न नियामकीय उपायों के माध्यम से संरक्षण प्रदान किया गया है।

 

वर्ष 2024 में अमेरिका का भारत को कृषि निर्यात 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें प्रमुख निर्यातों में छिलके सहित बादाम (86.8 करोड़ डॉलर), पिस्ता (12.1 करोड़ डॉलर), सेब (2.1 करोड़ डॉलर) और एथनॉल यानी एथिल अल्कोहल (26.6 करोड़ डॉलर) शामिल हैं। (India America Tarde Deal News) अग्रवाल ‘बायोफैच’ 2026 प्रदर्शनी में हिस्सा लेने पहुंचे हैं, जहां 100 से अधिक भारतीय प्रदर्शक और करीब 20 राज्य अपने जैविक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। यूरोपीय संघ इन उत्पादों का एक बड़ा बाजार माना जाता है।

 

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India America Trade Dealउन्होंने कहा, “दल इस पर काम कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि मार्च तक इसे (अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को) औपचारिक रूप दे दिया जाएगा।” श्रम-प्रधान क्षेत्रों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बढ़त देगा, क्योंकि अमेरिकी बाजार में उन देशों पर भारत से अधिक शुल्क लगाया जा रहा है।

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