टेक्नोलोजी

Smartphone Price Hike: जेब ढीली करने को रहें तैयार! 1 फरवरी से महंगे हो जाएंगे स्मार्टफोन? जानें कितनी बढ़ेगी कीमत

Smartphone Price Hike क्या बजट के बाद स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने वाली हैं या फिर कीमतों में बड़ी कटौती होगी? यह सवाल अभी यूजर्स के साथ-साथ इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मन में चल रही हैं। हर साल की तरह इस साल भी बजट से लोगों की काफी उम्मीदें हैं। आम लोग बजट पेश होने के बाद चीजों के सस्ते होने की उम्मीद लगाते हैं।

 

पिछले साल भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में कई देसी कंपनी ने एंट्री मारी है, जिसकी वजह से भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी कपनियों को कड़ी टक्कर मिलने लगी है। चीनी कंपनियों ने अपने फोन की कीमतें नहीं बढ़ाई। हालांकि, सैमसंग ने साल के आखिर में अपने कुछ मॉडल की कीमत में इजाफा किया है। बजट पेश होने के बाद क्या स्मार्टफोन महंगे हो जाएंगे? आइए, जानते हैं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

 

AI की बढ़ती डिमांड की वजह से मेमोरी कार्ड यानी चिप्स की शॉर्टेज हो गई है, जिसकी वजह से स्मार्टफोन कंपनियां ग्लोबल सप्लाई चेन का प्रेशर झेल रहे हैं। ऐसे में स्मार्टफोन कंपनियों के पास फोन की कीमत बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं है। हालांकि, कंपनियां अपने फोन की कीमत को यूजर्स के पहुंच से दूर भी नहीं रखना चाहते हैं। स्मार्टफोन लोगों की जरूरत का साधन बन गया है। ऐसे में कीमत बढ़ाने से पूरे मार्केट का संतुलन बिगड़ सकता है।

डीप वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा

AI+ स्मार्टफोन के CEO और Nxtquantum Shift टेक्नोलॉजीज के फाउंडर माधव सेठ (रियलमी के पूर्व सीईओ) का कहना है कि भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है, जो सिर्फ असेंबली लाइन तक सीमित नहीं रहेगा। एआई इंडिग्रेटेड डिवाइस की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिसकी वजह से फोन की कीमतें भी बढ़ी हैं। केंद्रीय बजट में डीप वैल्यू क्रिएशन को बढ़ावा देने की जरूरत है।

 

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मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की जरूरत

Smartphone Price Hikeभारत अब को फोन के कोर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, PCB आदि को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर ड्रिवन इनोवेशन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। टेक इंडस्ट्री की बजट में डिमांड है कि सरकार कुछ ऐसी रियायतें दे, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने में मदद करे। फिलहाल ज्यादातर कंपनियां भारत में स्मार्टफोन असेंबल करती हैं। इसके कोर कंपोनेंट बाहर से ही आउटसोर्स किए जाते हैं। ऐसे में बजट में रियायतें मिलने से फोन की कीमतें सामान्य रह सकती हैं या कम हो सकती हैं।

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