धर्म

Makar Sankranti 2026 Date: 14 या 15 जनवरी जानिए कब है मकर संक्रान्ति, जानिए शुभ मुहूर्त, तिथि और पुण्य काल

Makar Sankranti 2026 Date: जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। ये पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होता है। इस त्योहार से दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में इस पर्व को लोहड़ी (Lohri) के नाम से मनाया जाता है तो तमिलनाडु में ये त्योहार पोंगल (Pongal) के नाम से मनाते हैं। वहीं उत्तर-प्रदेश और बिहार में इस पर्व को खिचड़ी पर्व (Khichdi) के नाम से मनाया जाता है। मकर सं⁹क्रांति पर दही चूड़ा और खिचड़ी खाने की विशेष परंपरा है। चलिए जानते हैं इस साल ये पर्व कब मनाया जा रहा है और इसका महत्व क्या है।

 

मकर संक्रान्ति 2026 तिथि व पुण्य काल 

मकर संक्रान्ति – 14 जनवरी 2026, बुधवार

मकर संक्रान्ति पुण्य काल – 03:13 PM से 05:45 PM

मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल – 03:13 PM से 04:58 PM

मकर संक्रान्ति का क्षण – 03:13 PM

मकर संकांति शुभ रंग (Makar Sankranti Shubh Rang)

इस बार मकर संक्रांति का नाम मन्दाकिनी है और शुभ रंग पीला है। वहीं वाहन व्याघ्र और उपवाहन अश्व है।

 

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है 

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास या धनुर्मास भी समाप्त हो जाता है। खरमास के समाप्त होते ही शुभ कार्यों की फिर से शुरुआत हो जाती है। सूर्य के किसी भी संक्रांति के पुण्यकाल के दौरान दान और स्नान का विशेष महत्व होता है। इस दौरान विशेष रूप से काष्ठ यानि लकड़ी और अन्न दान करने का महत्व है, जबकि स्नान की बात करें, तो मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से गंगा नदी में स्नान का महत्व है। साथ ही इस दिन काशी में दशाश्वमेध घाट पर या प्रयाग में स्नान करके भी पुण्यफल पाये जा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति से सूर्य देव उत्तर दिशा की ओर गतिमान होते हैं जिसे अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और कंबल का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किया गया दान दरिद्रता दूर करता है।

 

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Makar Sankranti 2026 Dateएक कथा के अनुसार असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति पर्व मनाने की शुरुआत हुई। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार किया था और उनके सिरों को मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। कहते हैं तभी से इस दिन मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Rgh एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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