Securities Markets Code Bill: शेयर मार्केट में 3 बड़े बिल होंगे मर्ज, आम निवेशकों को होगा बड़ा फायदा

Securities Markets Code Bill शेयर मार्केट में निवेश करने वालों के लिए बहुत बड़ी खबर है. सरकार पुराने ज़माने के तीन बड़े कानूनों को खत्म करके एकदम नया और आसान कानून लाने जा रही है. इसका नाम सिक्योरिटीज मार्केट कोड बिल 2025 है . आगामी 1 दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में यह बिल पेश होगा.
इस नए कानून में सेबी एक्ट 1992, डिपॉजिटरी एक्ट 1996 और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट (रेगुलेशन) एक्ट 1956. इन तीनों पुराने कानूनों को मिलाकर सिर्फ एक कानून बना दिया जाएगा. साल 2021-22 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सबसे पहले इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि अलग-अलग कानूनों की वजह से कंपनियों और निवेशकों को बहुत झंझट होती है, अब सारी बातें एक ही जगह होंगी. इससे निवेशकों को कानून समझने और उनका पालन करने में भी आसानी होगी.
आम निवेशकों को ये होगा फायदा
आम निवेशकों के लिए इससे बहुत फायदा होने वाला है. कंपनियों को कानून मानने में जो आज करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, वो काफी कम हो जाएंगे. सेबी, डिपॉजिटरी और सरकार के अलग-अलग नियमों में जो कन्फ्यूजन रहता है, वह पूरी दूर हो जाएगा. सारे नियम एकदम साफ और आसान हो जाएंगे. सबसे बड़ी बात यह है कि सरकारी बॉन्ड और लोन से जुड़ा कानून भी इसी में शामिल हो रहा है, इसलिए विदेशी निवेशक भारत पर ज्यादा भरोसा करेंगे.
शेयर मार्केट हो या बॉन्ड मार्केट, सब कुछ एक ही छत के नीचे आ जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया कानून आते ही भारत का शेयर मार्केट पूरी तरह मॉडर्न हो जाएगा. छोटे निवेशक से लेकर बड़े-बड़े फंड तक, सभी की जिंदगी आसान हो जाएगी. पैसा लगाना, निकालना, ट्रेडिंग करना सब कुछ तेज और सरल हो जाएगा. अगर यह बिल पास हो गया, तो आने वाले कुछ सालों में शेयर मार्केट में निवेश करने का पूरा तरीका ही बदल जाएगा.
बढ़ जाएगी FDI की लिमिट
Securities Markets Code Billइसके साथ ही सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने वाला विधेयक पेश करेगी. संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष के बजट भाषण में बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की मौजूदा 74 प्रतिशत सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था. यह प्रस्ताव नई पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र सुधारों का हिस्सा है.



