देश

IAF MIG-21 Retires: 62 साल बाद रिटायर हुआ IAF MIG-21; 1965, 1971 और कारगिल जंग में शामिल रहा…

IAF MIG-21 Retires अनुशासन, शौर्य-साहस के समन्वय के प्रतीक और तीन जंगों में दुश्मनों के ठिकानों को ध्वस्त करने वाले मिग-21 को शुक्रवार को विदाई दी गई। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश के सबसे ऐतिहासिक लड़ाकू विमानों में से एक मिग-21 की अंतिम उड़ान पूरी कर भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने मिग-21 के टेल नंबर 2777 के साथ एयरबेस पर सुरक्षित लैंडिंग की। इस मौके पर पूरा वायुसेना परिवार गर्व और भावनाओं से भरा नजर आया।

 

विदाई से पहले मिग-21 को वॉटर कैनन सैल्यूट दिया गया। इसी दौरान सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने अपनी प्रस्तुति शुरू की। मिग-21 की अंतिम उड़ान को देखकर इन्हें उड़ाने वाले पूर्व वायु सैनिक भावुक हो गए। चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित विदाई समारोह के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत तीनों सेनाओं के प्रमुख गवाह बने। ठीक उसी तरह जब 62 वर्ष पहले भारत में मिग लाने में उस वक्त के रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन का बड़ा रोल था

 

अनुशासन, समन्वय और साहस का प्रतीक

उड़ान पूरी करने के बाद एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि मिग-21 सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के अनुशासन, समन्वय और साहस की जीवंत पहचान है। यह विमान दशकों से हमारे वीर पायलटों का साथी रहा है और हर कठिन परिस्थिति में उसने अपनी विश्वसनीयता साबित की है। मिग-21 न केवल भारतीय वायुसेना के युद्धों में योगदान देने वाला विमान रहा, बल्कि यह पायलटों के प्रशिक्षण और साहस का प्रतीक भी रहा। छह दशकों तक सेवा देने के बाद, यह विमान अब इतिहास का हिस्सा बन गया।

मिग-21 का गौरवशाली इतिहास

सोवियत संघ से मिले इस विमान ने 1960 के दशक में भारतीय वायुसेना में प्रवेश किया था। 1965 और 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल संघर्ष तक, मिग-21 ने कई अहम अभियानों में अपनी ताकत दिखाई। इसे “टाइप-77” के नाम से भी जाना जाता

12 दिन के लिए बंद रहेगा चंडीगढ़ एयरपोर्ट, 26 अक्टूबर से 7 नवंबर तक स्थगित होंगी उड़ानें

 

लंबे समय तक भारतीय आसमान की सुरक्षा का प्रहरी बने रहने के बाद अब मिग-21 को चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर किया जा रहा है। इसके स्थान पर अत्याधुनिक तेजस एलसीए मार्क 1ए, सुखोई-30 और राफेल जैसे आधुनिक विमान वायुसेना की ताकत बन चुके हैं।

 

अंतिम उड़ान का भावनात्मक क्षण

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के लिए यह उड़ान केवल तकनीकी रूप से नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रही। मिग-21 से उनका करियर गहराई से जुड़ा रहा है और इस अंतिम उड़ान ने उन्हें वायुसेना के गौरवशाली इतिहास की यादों से जोड़ दिया। एयरबेस पर मौजूद अधिकारियों और जवानों ने तालियों और सलामी के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बने।

 

 

मिग-21 का महत्व और विदाई

मिग-21 को अक्सर ‘टाइम-टेस्टेड वॉर मशीन’ कहा गया है। हालांकि बीते वर्षों में तकनीकी सीमाओं और दुर्घटनाओं के चलते इसे धीरे-धीरे सेवा से हटाया जा रहा है। फिर भी, यह विमान भारतीय वायुसेना की शौर्य गाथा का अभिन्न हिस्सा हमेशा बना रहेगा।

 

मिग-21 की कमी खलेगी

थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि मिग-21 बहुत ताकतवर था। यह पल भावुक करने वाला है। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष बीएस धनोआ ने कहा कि मिग की ताकत का लोहा दुश्मन भी मानता था और आज तक घबराता था। मिग-21 की कमी जरूर खलेगी, लेकिन अब नए जंगी जहाज ताकत बढ़ाएंगे।

 

Read more RBI Digital Payment Rules: RBI ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियम किया बड़ा बदलाव, धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम …

 

वीरता की अब तक की यात्रा में मिग-21 का बहुत बड़ा योगदान

IAF MIG-21 Retiresरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा-आज मैं सबसे पहले भारतीय वायुसेना के वीरों को नमन करता हूं। आजादी से लेकर अब तक भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शौर्य पराक्रम का परिचय दिया है। वीरता की अब तक की यात्रा में मिग-21 का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आज मिग-21 की ऑपरेशनल जर्नी से विदाई हो रही है तो यह अध्याय भारतीय वायुसेना के इतिहास के साथ-साथ हमारी सैन्य टीम की जर्नी में गोल्डन लेटर से लिखा जाएगा।

 

Related Articles

Back to top button