खेतों में गीला पड़ा धान,खरीदी बंद,अन्नदाता परेशान

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में मिचौंग तूफान ने धान के साथ टमाटर, चने और कई मिलेट्स की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। ज्यादातर किसानों का धान अब भी खेतों पर पड़ा हुआ है। बचाव के इंतजाम के बाद भी धान भीग रहा है। बारिश के कारण खरीदी केंद्रों में अघोषित रूप से धान खरीदी की प्रक्रिया बंद कर दी गई है।
बारिश से हो रही किसानों की समस्याएं जानने के लिए भास्कर टीम सबसे पहले रायपुर के भाठागांव स्थित धान खरीदी केंद्र पहुंची। यहां पर धान खरीदी केंद्र का मेन गेट बंद था। अंदर ट्रक में वहां पर रखा धान लोड किया जा रहा था। खरीदी केंद्र में समिति के सहायक प्रबंधक इंदौरिया से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बारिश बंद हाेने के बाद धान खरीदी होगी। किसान धान सुखाकर लाएंगे उसके बाद फिर से खरीदी की जाएगी।
अमलेश्वर में बारिश की वजह से खरीदी बंद
भास्कर टीम ने दुर्ग जिले के अमलेश्वर ग्राम पंचायत की तरफ रूख किया। बारिश की वजह से लोग घर के अंदर दिखे। अमलेश्वर के खुड़मुड़ा गांव में खेतों में बारिश से बचाने के लिए धान तिरपाल की तीन परतों में ढंका हुआ था। यहां किसान लेखचंद्र साहू से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया, कि टोकन लेकर दो बार धान बेच चुके हैं।
तीसरे टोकन से धान समिति को देना था, लेकिन बारिश की वजह से समिति ने खरीदी बंद रखी है। समिति ने टोकन कैंसिल होने की जानकारी दी है। अब बारिश बंद होने के बाद जब दोबारा धान खरीदी शुरू होगी, तब जाकर धान बेचेंगे।
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पाटन में बारिश से टमाटर की फसल बर्बाद
बेमौसम बारिश से धान की फसल के अलावा टमाटर की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। पाटन में टमाटर की खेती करने वाले किसान रामकुमार ने बताया, कि तीन दिन से रुक-रुककर बारिश जारी है। फसल को पानी ज्यादा मिलने और दवा का छिड़काव नहीं होने से कीड़े लगने का डर है।
पानी ज्यादा मिलने की वजह से टमाटर के खेतों में नमी ज्यादा हो रही है। जितना लगाया था सब चौपट होता दिख रहा है। मेहनत के साथ आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
सरगुजा संभाग में भी खरीदी बंद
सरगुजा संभाग में चार दिन से धान खरीदी बंद है। सरगुजा संभाग में हो रही बारिश के कारण चार दिनों से समितियों में धान की खरीदी बंद है। बेमौसम बारिश से खेत से खलिहान तक धान भीग गया है। संभाग में अभी धान कटाई और मिंजाई का काम चल ही रहा था कि धान के भीगने से किसानों की समस्या बढ़ गई है।
समितियों में कुछ किसान टोकन लेने जरूर पहुंच रहे हैं, लेकिन बारिश के दौरान धान में नमी आने के डर से वो धान लाने को तैयार नहीं हैं।
सरगुजा में अब तक तीन प्रतिशत खरीदी
सरगुजा संभाग के पांच जिलों सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और एमसीबी (मनेंद्रगढ़,चिरमिरी,भरतपुर) जिलों को मिलाकर 10 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य है। अब तक सिर्फ तीन लाख टन क्विंटल धान की आवक हो पाई है जो करीब तीन फीसदी है। जिला सहकारी बैंक के सीईओ सुनील वर्मा ने बताया कि बारिश के कारण चार दिनों से समितियों में धान की आवक लगभग जीरो है।
टाऊ और कोदो की फसल को नुकसान
सामरी और मैनपाट इलाके में टाऊ की खेती करने वाले किसान भी बेमौसम बारिश से परेशान हैं। लगातार बारिश से टाऊ की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। टाऊ की फसल कुछ दिनों में तैयार होने वाली थी, लेकिन हवा से फसल गिर गई है और बारिश में भीग गई है। इससे किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं मिलेट्स के रूप में विख्यात कोदो की फसल भी खराब हो रही है।
दो जिलों में होती है टाऊ की खेती
टाऊ मुख्य रूप से तिब्बत के पहाड़ी क्षेत्र की फसल है। छत्तीसगढ़ में केवल सरगुजा व जशपुर जिले में ही टाऊ की फसल ली जा रही है। फसल के रखरखाव एवं उपजाने के सही तरीके की जानकारी नहीं होने के कारण कई बार किसानों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। अगर उन्हें सही जानकारी दी जाए, तो 1 एकड़ में 3-4 लाख रुपए के टाऊ की उपज हो सकती है। टाऊ का आटा निकाल कर उपवास के दौरान फलाहार के रूप में लेते हैं।
बिलासपुर में 10 प्रतिशत धान पहुंचा खरीदी केंद्र
बिरकोना के किसान विनोद साहू का कहना है कि दिवाली पड़ने से धान की कटाई में देरी हुई है, जिसके चलते अभी केंद्रों में गिने-चुने किसान ही धान लेकर पहुंच रहे हैं। जिन किसानों ने अर्ली वैरायटी की धान उगाई है, उनका ही धान केंद्र तक पहुंच रहा है। जबकि, ज्यादातर किसानों के धान अभी खेत और खलिहान में हैं। बारिश की वजह से उसी धान को नुकसान पहुंचने का डर है।
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दो-तीन दिन बारिश हुई तो भारी नुकसान
भास्कर की टीम ने ने सेंदरी, भरारी, भरनी सहित आसपास के इलाकों में जाकर किसानों से बात की। ज्यादातर किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्रों में बारिश से बचाने तारपोलीन का इंतजाम किया गया है। किसानों के खेत और खलिहानों में रखे धान को बचाने के लिए जिला प्रशासन कहां से इंतजाम करेगा इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
Chhattisgarh News: किसानों का कहना है कि आने वाले दो-तीन दिन तक ऐसा ही मौसम रहा और बारिश हुई तो धान की कटाई में दिक्कत आएगी। बारिश थमने के बाद केंद्रों में धान बेचने में भी उन्हें क्वॉलिटी को लेकर परेशान होना पड़ेगा।



