देश

3 पॉइंट में जानिए लॉकडाउन क्यों नहीं लगेगा

भारत में ओमिक्रॉन की लहर बेकाबू होती जा रही है। जहां 27 दिसंबर 2021 को देश में कोरोना के 6,780 नए मामले सामने आए थे, वहीं सिर्फ 20 दिन बाद यह आंकड़ा 2.68 लाख पर पहुंच गया। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई राज्यों में कर्फ्यू, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू हो गई है। ऐसे में हर किसी के मन में बस एक सवाल है कि क्या दूसरी लहर की तरह इस बार भी लॉकडाउन लगेगा?

फिलहाल केंद्र और राज्य सरकारों ने टोटल लॉकडाउन के कोई संकेत नहीं दिए हैं। आइये 4 पॉइंट्स में समझते हैं कि लॉकडाउन का फैसला लेना क्यों जरूरी नहीं है..

1. अभी ओमिक्रॉन से मौतों का खतरा काफी कम
भले ही 27 दिसंबर से ओमिक्रॉन के कारण कोरोना मरीजों की संख्या में उछाल आया है, लेकिन अभी तक ये डेल्टा की तरह जानलेवा साबित नहीं हुआ है। कई शोधों में इसे वायरस का माइल्ड वैरिएंट बताया जा रहा है। केरल को अलग रखें, तो देश में कोरोना की दूसरी लहर 12 फरवरी 2021 को आ गई थी। तीसरी लहर की शुरुआत 22 दिसंबर 2021 को हुई थी। डेल्टा लहर के 23वें दिन कोरोना मौतों की दर 0.64% थीं। ये एक हफ्ते की औसत दर है। ओमिक्रॉन लहर में ये दर केवल 0.07% ही है।

2. ओमिक्रॉन लहर की पीक भी नहीं होगी जानलेवा
ऐसा कहा जा रहा है कि ओमिक्रॉन लहर की पीक जनवरी के अंत और फरवरी की शुरुआत में आएगी। डेटा के अनुसार, डेल्टा लहर की पीक में लोगों को जितना नुकसान हुआ था, ओमिक्रॉन के दौरान वो स्थिति नहीं बनेगी। फिलहाल डेल्टा की पीक के मुकाबले देश में ओमिक्रॉन के मामले 52% हैं। वहीं, मृत्यु दर केवल 3.3% ही है। ओमिक्रॉन की पीक आने पर इन आंकड़ों में बढ़ोतरी जरूर होगी, लेकिन फिर भी डेल्टा की तुलना में मौतें कम ही होंगी।

3. दिल्ली में ओमिक्रॉन की पीक करीब, पर अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज कम

राजधानी की बात की जाए, तो यहां ओमिक्रॉन की लहर 16 दिसंबर को ही आ गई थी। यहां ओमिक्रॉन की पीक बेहद करीब है। 13 जनवरी 2022 को दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों की संख्या 2,969 थी। पिछली लहर की पीक में ये संख्या 21,154 थी। इसके अलावा, डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन होने पर होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों की संख्या में भी उछाल आया है।

लॉकडाउन नहीं, फिर भी ओमिक्रॉन से बचना जरूरी, ये गरीबों को कर सकता है परेशान

भले ही ओमिक्रॉन के दौरान हॉस्पिटलाइजेशन कम हो, लेकिन इससे बचना भी हमारे लिए बेहद जरूरी है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के डेटा के अनुसार, भारत की 60% लो इंकम आबादी ही देश के 30% सबसे महंगे मेडिकल खर्चों का भार उठाती है। ये खर्चे उधारी से या संपत्ति बेचकर किए जाते हैं। वहीं देश के टॉप 20% अमीर लोग केवल 15% मामलों में ही ऐसे खर्च करते हैं।

तो फिर ओमिक्रॉन से बचने का क्या है उपाय?

ओमिक्रॉन से बचना है तो सामाजिक दूरी और मास्क लगाना जरूरी है। इसके अलावा, वैक्सीनेशन बढ़ाने और तीसरी लहर की पीक आने तक जरूरी पाबंदियों को लगाने से ही संक्रमण से बचा जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button