✍️कोई काम का नही एक्के नंबर सब्बो बर डायल 112 ,फोन तो लगता है पर समाधान किसी का नही, क्या है पूरा मामला पढ़ें RGHNEWS के साथ*

RGH NEWS प्रशांत तिवारी सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद आम जन को सरकारी सुविधाओं का लाभ आज भी मिलता नही दिख रहा है। एक्के नंबर सब्बो बर डायल 112 जरूरत के समय लगाने से नही लगता, जब लगता है तो कम्पयूट्राईज नंबर फालो करते-करते उंगलियां थक जाए। उस पर तुर्रा यह कि फोन करने वाले को समाधान इसके बावजूद नही मिल पाता। ऐसे में लॉकडाउन की स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है, और लोगों को सरकारी सुविधा नही मिलने से जरूरत के समय इस नंबर पर फोन करने वाले हितग्राही बेवजह परेशान होते रहते हैं। राज्य सरकार के द्वारा डायल 112 को प्रदेश की किसी भी आकस्मिक समस्या के समाधान के लिए एक्के नंबर सब्बो बर के उद्देश्य के साथ लांच किया गया था। किंतु डायल 112 लोगों की समस्याओं के समाधान में कारगर भूमिका नही निभा पा रहा है। फोन करने वाले को फोन पर फोन करने पड़ते हैं और बेवजह परेशान होनेंं के बावजूद उन्हें समाधान नही मिल पाता। हमारे संवाददाता ने इस संबंध में मंगलवार को इस नंबर की वस्तुस्थिति की जांच करने के लिए मन बनाया और अपने पास उपलब्ध एक जानकारी जो कि भिलाई दुर्ग से आए हुए संदिग्ध कोरोना मरीज की पुष्टि के लिए इस नंबर पर फोन लगाया, उक्त युवक लॉकडाऊन के पूर्व से दूसरे जिले में प्रवास पर गया हुआ था और कल देर रात गुपचुप तरीके से अपने घर लौटा था। हमारे संवाददाता ने उक्त युवक के कोरोना स्क्रीनिंग से संबंधित जानकारी के लिए डायल 112 पर फोन लगाकर आपरेटर को इस संबंध में सारी जानकारी दी और कुछ देर बाद संवाददाता को यह बताया गया कि शहर के भानुप्रताप कालोनी में निवासरत उक्त युवक मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ लौटा है और उसे होम आईसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कुछ देर बाद पता चला कि हमारे संवाददाता ने युवक का जो पता बताया था दरअसल वहां डायल 112, 104 या पीसीआर की कोई भी टीम तस्दीक के लिए नही पहुंची थी। दूसरी बार जब डायल 112 को फोन करके वस्तुस्थिति की जानकारी दी गई तो संवाददाता को अपडेट करने के नाम पर कुछ देर रूकने के लिए कहा गया और बाद में यह बताया गया कि उक्त युवक को नजदीकी क्वारंटाईन सेंटर में भर्ती करा दिया गया है। गजब की बात यह है कि थोडी ही देर बाद हमारे संवाददाता को फिर एक फोन आया जिसमें डायर 112 की जगह डायल 102 की ओर से फोन करके पूछा गया कि उनके द्वारा मांगे गए एंबुलेंस को कहां भिजवाना है। कुल मिलाकर सरकारी नंबरों पर घंटो मशक्कत करने के बावजूद एक पत्रकार को सही समाधान उपलब्ध नही हो सका। ऐसे में सवाल उठता है कि केन्द्र या राज्य सरकार के द्वारा जारी इन नंबरों का क्या औचित्य है और समाधान न होनें की स्थिति में इनकी शिकायत कहां की जाए। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार को इस संबंध में चिंतन करने की व्यवहारिक समाधान की दिशा में समुचित प्रयास करने की जरूरत है। अनूप ठाकुर ने हमारे सवांददाता को बताया कि अभी कुछ दिन पहले उनकी पत्नी को डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल लेकर जाना था, उसके बाद उनके द्वारा महतारी एक्सप्रेस का डायल नंबर 102 कई बार डायल किया गया, परंतु हर बार नंबर अमान्य बताता रहा। इस दौरान गाड़ी नही मिल पाने की स्थिति में उनकी परेशानी बढ़ते जा रही थी, क्योकि लॉकडाउन चलने से उनको रात में कोई वाहन नही मिल पा रहा था, इसके बाद जैसे तैसे वाहन का व्यवस्था करके हॉस्पिटल पहुँचा गया।



